बंगाल में राजनीति गर्माई, उपचुनाव से पहले शुभेंदु का ममता को झटका 17 एनसीपीआई सांसद फिर करेंगे खेला, भाजपा में होंगे शामिल! रितेश सिन्हा। पश्चिम बंगाल की सियासत में दुर्गापूजा से पहले एक बार फिर से बड़ा खेल होने की संभावना बढ़ गई है। इसकी पटकथा दिल्ली में प्रदेश के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने लिखी थी जब अपने संक्षिप्त प्रवास के दौरान उन्होंने टीएमसी के बागी व एनसीपीआई के सांसदों से मुलाकात की थी। अब भाजपा में इन सांसदों के शामिल होने की संभावना बढ़ने से ममता को तगड़ा झटका लग सकता है। इसी साल उन्होंने अगस्त के महीने में नई दिल्ली स्थित बंग भवन में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर बने नए राजनीतिक गुट एनसीपीआई के 20 बागी सांसदों के साथ 1 घंटे से अधिक समय तक बैठक की थी। इस बैठक में सुदीप बंद्योपाध्याय, शताब्दी राय, रचना बनर्जी, माला राय और काकोली घोष दस्तीदार समेत तृणमूल छोड़कर आए 20 एनसीपीआई सांसद शामिल हुए थे। अब मोदी मंत्रिमंडल के प्रस्तावित विस्तार में पश्चिम बंगाल को बड़ा प्रतिनिधित्व मिल सकता है। इसको देखते हुए टीएमसी के बागी व कूचबिहार से सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया के दावे में दम दिखता है। बसुनिया ने अपनी प्रेसवार्ता में ये भी खुलासा किया कि एनसीपीआई के 20 में से 17 सांसद दुर्गापूजा के आसपास भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इन सांसदों के भाजपा में शामिल होने का ये बड़ा कारण बताया जा रहा है। बंगाल के विकास के लिए अब डबल इंजन सरकार एक बड़ी योजना पर काम कर रही है। गृहमंत्री अमित शाह लगातार बंगाल के दौरे पर जाकर इसकी रूपरेखा बना रहे हैं। आपको बता दें कि लंबे समय तक वामदलों की सरकार रहने से केंद्रीय योजनाओं से बंगाल उपेक्षित रहा। भाजपा के केंद्रीय नेताओं का मानना है कि बंगाल को पूर्व में कांग्रेस और अन्य दलों की सरकारों ने उपेक्षित रखा था। शुभेंदु को केंद्र सरकार पूरी ताकत देते हुए बंगाल को मुख्यधारा में लाना चाहती है। राष्ट्रीय राजमार्ग, औद्योगिकीकरण, आईटी हब और नए शहरों को क्रमबद्ध तरीके से विकसित करने की योजना पर अमल हो सके, इसके लिए बंगाल को विशेष पैकेज भी दिए जाने की संभावना है। शुभेंदु अधिकारी लगातार केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों से समन्वय बना रहे हैं और बंद पड़ी योजनाओं को तेजी से क्रियान्वयन करने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। बसुनिया ने सोमवार को अपनी पत्रकार वार्ता में खुलासा किया कि सबकुछ ठीक रहा तो 17 सांसद एक साथ भाजपा में जाने की योजना को शीघ्र ही अमली-जामा पहना सकते हैं। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कानूनी दांव-पेंचों से बचते हुए एक साथ दो-तिहाई से अधिक सांसदों के दल बदलने से उन पर दल-बदल कानून लागू नहीं हो सकेगा। यही वजह है कि एक साथ 17 सांसद पाला बदलते हुए भाजपा में जाने को तैयार हैं। आपके संज्ञान में ला दें कि इसी साल 14 जून को तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया में विलय का एलान करते हुए एनडीए को अपना समर्थन दिया था। कानून विषेशज्ञों का मानना है कि दल-बदल कानून के अंतर्गत अगर 20 में से कम से कम 14 सांसद एक साथ किसी दल में शामिल होते हैं तो अयोग्यता से बच सकते हैं। ऐसे में जगदीश बसुनिया के दावे में दम है। इसी आशंका से बचते हुए लगभग 17 सांसदों का भाजपा के मैनेजरों ने गणित तैयार किया है कि ऐन मौके पर 1-2 अगर आगे-पीछे भी गच्चा देते हैं तो भी गणित नहीं बिगड़ेगा। एक अन्य सवाल के जवाब में बसुनिया ने स्वीकार किया अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय के यूसुफ पठान, अबू ताहेर खान और खलीलुर रहमान भाजपा में शामिल होने से बच रहे हैं, लेकिन अपना समर्थन एनडीए को दिया है। बसुनिया के बदले राजनीतिक रुख से इलाके में इनका भारी विरोध है। कुछ दिनों पहले उनके आवास के बगल में स्थित टीएमसी कार्यालय में आगजनी की घटना हुई थी।
बंगाल में राजनीति गर्माई
उपचुनाव से पहले शुभेंदु का ममता को झटका, 17 एनसीपीआई सांसद फिर करेंगे खेला, भाजपा में होंगे शामिल!
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बंगाल में राजनीति गर्माई, उपचुनाव से पहले शुभेंदु का ममता को झटका 17 एनसीपीआई सांसद फिर करेंगे खेला, भाजपा में होंगे शामिल!
मुख्य बातें
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