प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के इतर फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड आर. मार्कोस जूनियर के साथ द्विपक्षीय बैठक की। मार्कोस आसियान के मौजूदा अध्यक्ष के तौर पर सम्मेलन में शामिल होने भारत आए हैं। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच मजबूत होते संबंधों का प्रतीक है और क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
बैठक में दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति पर संतोष जताया। उन्होंने रक्षा और सुरक्षा, व्यापार और निवेश, अंतरिक्ष, रेलवे अवसंरचना, फिनटेक, शिक्षा, पर्यटन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग गहरा करने पर सहमति जताई। इन क्षेत्रों में सहयोग से दोनों देशों को आर्थिक और रणनीतिक रूप से लाभ होगा।
दोनों देशों ने अगस्त 2025 में मार्कोस की भारत की राजकीय यात्रा के दौरान रणनीतिक साझेदारी स्थापित की थी। नेताओं ने इसी साझेदारी के तहत संबंधों को आगे बढ़ाने की बात कही। इस रणनीतिक साझेदारी का उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना है। बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी मौजूद रहे, जो इस वार्ता के महत्व को दर्शाता है।
इस यात्रा के दौरान फिलीपींस भारत की पहल पर बने आपदा रोधी अवसंरचना गठबंधन (सीडीआरआई) का 71वां सदस्य बन गया। यह सदस्यता फिलीपींस के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, खासकर प्रशांत क्षेत्र में उसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, जहां वह अक्सर प्राकृतिक आपदाओं का सामना करता है।
सीडीआरआई की सदस्यता से फिलीपींस को आपदा से सुरक्षित बुनियादी ढांचे के लिए तकनीकी विशेषज्ञता, बेहतर तौर-तरीकों और संभावित वित्तीय सहायता तक पहुंच मिलने की उम्मीद है। सीडीआरआई की शुरुआत भारत ने वर्ष 2019 में की थी, जिसका उद्देश्य आपदाओं के प्रति लचीले बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देना है।
मार्कोस के साथ यह बैठक ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की व्यस्त कूटनीतिक गतिविधियों का हिस्सा रही। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने तीन दिनों में कुल 15 द्विपक्षीय बैठकें कीं, जो भारत की सक्रिय विदेश नीति को दर्शाती हैं।
भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और आसियान के साथ व्यापक रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है। यह बैठक न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करती है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

