सच्ची खबरें • मज़बूत भारत
लाइव टीवी

SpaceX Falcon 9 से तीन भारतीय स्टार्टअप के मिशन लॉन्च, अंतरिक्ष में भारत की नई छलांग

AI कंप्यूटिंग से थर्मल इमेजिंग तक, भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि।

झटपट समझें

SpaceX के Falcon 9 रॉकेट ने Transporter-18 मिशन के तहत तीन भारतीय स्टार्टअप के space-technology missions को अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक पहुंचाया है, जिसमें AI कंप्यूटिंग और थर्मल इमेजिंग का परीक्षण शामिल है।

मुख्य बातें

  • SpaceX के Falcon 9 रॉकेट ने Transporter-18 मिशन के तहत 3 भारतीय स्टार्टअप के मिशन लॉन्च किए।
  • TakeMe2Space का MOI-1A भारत का पहला orbital-computing satellite है, जो अंतरिक्ष में AI से डेटा प्रोसेस करेगा।
  • MOI-1A में Nvidia Orin NX आधारित edge-computing hardware, 117 TOPS क्षमता और 2 TB स्टोरेज है।
  • Dhruva Space का LEAP-2 एक commercial hosted-payload mission है, जो विभिन्न तकनीकों का परीक्षण करेगा।
  • SatLeo Labs का TAPAS-1 भारत का पहला dedicated commercial CubeSat-category thermal payload है।
  • यह मिशन भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को उन्नत AI कंप्यूटिंग और थर्मल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में ले जा रहा है।
अंतरिक्ष में भारत की नई छलांग, 3 भारतीय स्पेस स्टार्टअप के मिशन लॉन्च।
यह मिशन भारतीय निजी अंतरिक्ष क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है।

नई दिल्ली: भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। SpaceX के Falcon 9 रॉकेट ने Transporter-18 मिशन के तहत भारतीय स्टार्टअप्स के तीन महत्वपूर्ण space-technology missions को अंतरिक्ष में पहुंचाया है। California के Vandenberg Space Force Base से हुए इस launch में कुल 130 payloads शामिल थे। मिशन को सफल दर्ज किया गया है।

इन भारतीय missions में सबसे खास Hyderabad की TakeMe2Space⁠ का MOI-1A है, जिसे कंपनी भारत का पहला orbital-computing satellite बताती है। इसका उद्देश्य satellite से प्राप्त विशाल raw data को पहले पृथ्वी पर भेजने के बजाय अंतरिक्ष में ही AI की मदद से process करना है।

50 किलो से कम वजन वाले MOI-1A में Nvidia Orin NX आधारित edge-computing hardware लगाया गया है। यह satellite 117 TOPS तक computing क्षमता, करीब 2 TB onboard storage और nine-band multispectral imaging system लेकर गया है। ग्राहक अपने AI models satellite पर upload कर सकेंगे और satellite किसी निर्धारित क्षेत्र के ऊपर से गुजरते समय data को process करके केवल उपयोगी analysis पृथ्वी पर भेज सकेगा।

इसका व्यावहारिक उपयोग agriculture, mining, insurance और supply-chain monitoring जैसे क्षेत्रों में हो सकता है। TakeMe2Space ने इस mission के लिए 23 customers हासिल किए हैं। कंपनी भविष्य में interconnected orbital-computing satellites का network बनाने की योजना भी बना रही है।

दूसरा महत्वपूर्ण भारतीय mission Hyderabad की Dhruva Space⁠ का LEAP-2 है। यह कंपनी के P-30 satellite platform पर आधारित commercial hosted-payload mission है। LEAP-2 पर अलग-अलग कंपनियों की technologies को orbit में test किया जाएगा। Dhruva Space ने satellite को Falcon 9 के साथ integrate करने से लेकर mission delivery तक की जिम्मेदारी संभाली है।

LEAP-2 के साथ Ahmedabad स्थित SatLeo Labs का TAPAS-1 भी गया है। कंपनी इसे भारत का पहला dedicated commercial CubeSat-category thermal payload बताती है। लगभग तीन किलो का यह payload long-wave infrared sensing के जरिए पृथ्वी की सतह के तापमान में अंतर को अंतरिक्ष से मापने के लिए बनाया गया है।

इस तकनीक से शहरों में heat islands, खेतों में crop stress, industrial activity, infrastructure और प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े temperature patterns की निगरानी संभव हो सकती है। सामान्य optical satellite camera जहां मुख्यतः reflected light देखता है, वहीं thermal sensor सतह से निकलने वाली heat को माप सकता है।

Transporter-18 स्वयं भी बड़ा rideshare mission है। SpaceX के आधिकारिक mission विवरण के मुताबिक Falcon 9 पर CubeSats, microsatellites, hosted payloads और orbital-transfer vehicles समेत 130 payloads रखे गए थे।

हालांकि एक महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर स्पष्ट रखना जरूरी है। Falcon 9 का सफल launch होने का अर्थ यह नहीं है कि MOI-1A की पूरी orbital-computing capability पहले ही operational साबित हो चुकी है। India Today के अनुसार MOI-1A को orbital-transfer vehicle के जरिए उसकी लक्षित orbit में पहुंचाने की प्रक्रिया 8 अक्टूबर तक चल सकती है। इसके बाद onboard AI और अन्य systems का वास्तविक परीक्षण शुरू होगा।

इन तीन missions की अहमियत इसलिए भी है क्योंकि भारतीय private-space ecosystem अब केवल satellites बनाने या launch services खरीदने तक सीमित नहीं रह गया है। कंपनियां space-based AI computing, commercial thermal intelligence और hosted-payload infrastructure जैसे अधिक उन्नत क्षेत्रों में उतर रही हैं।

यह खबर शेयर करें

WhatsAppXFacebook