लखनऊ, 24 अक्टूबर 2026। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) के एक प्रवर्तन अधिकारी और एक हेड कांस्टेबल को रिश्वतखोरी के मामले में गिरफ्तार किया है। दोनों पर ईडी की जांच का सामना कर रहे एक व्यक्ति को राहत दिलाने के बदले पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार और हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी के रूप में हुई है। दोनों लखनऊ स्थित ईडी के जोनल कार्यालय में तैनात थे। सीबीआई ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करके कार्रवाई की।
दो बार समन मिलने के बाद मांगी गई रिश्वत सीबीआई के अनुसार, शिकायतकर्ता के पिता से जुड़े एक मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा था। उन्हें अगस्त और सितंबर 2026 में ईडी के लखनऊ कार्यालय से दो बार समन जारी किए गए थे।
आरोप है कि इसी मामले में राहत दिलाने के लिए हेड कांस्टेबल मनोज द्विवेदी ने रिश्वत की मांग की। सीबीआई को दी गई शिकायत में बताया गया कि रकम प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार की ओर से मांगी जा रही थी।
मनोज द्विवेदी मूल रूप से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का कर्मचारी है और प्रतिनियुक्ति पर ईडी कार्यालय में कार्यरत था।
सीबीआई ने जाल बिछाकर की गिरफ्तारी शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने रिश्वत के आरोपों की जांच की और आरोपियों को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
एजेंसी के अनुसार, मनोज द्विवेदी को प्रवर्तन अधिकारी दीपक कुमार की ओर से रिश्वत स्वीकार करते समय पकड़ा गया। इसके बाद दीपक कुमार को भी गिरफ्तार कर लिया गया।
दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, हेड कांस्टेबल को दिल्ली में रकम लेते हुए पकड़ा गया, जबकि दीपक कुमार को लखनऊ स्थित ईडी कार्यालय से हिरासत में लिया गया।
हालांकि, रिश्वत की बरामद रकम को लेकर रिपोर्टों में अंतर है। सीबीआई के बयान पर आधारित पीटीआई की रिपोर्ट में पांच लाख रुपये स्वीकार किए जाने की जानकारी है, जबकि अमर उजाला ने 3.50 लाख रुपये लेते हुए गिरफ्तारी की बात कही है। इस अंतर पर आगे आधिकारिक स्पष्टीकरण अपेक्षित है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रिश्वत मांगने और स्वीकार करने में अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भी भूमिका थी या नहीं।
अमर उजाला के अनुसार, आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर तलाशी भी ली गई है। हालांकि, तलाशी के दौरान किसी अतिरिक्त रकम या दस्तावेज की बरामदगी के संबंध में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
फिलहाल दोनों के खिलाफ आरोपों की जांच जारी है। गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है और मामले का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद होगा।
जांच एजेंसियों की जवाबदेही पर उठे सवाल प्रवर्तन निदेशालय देश में मनी लॉन्ड्रिंग और विदेशी मुद्रा कानूनों से संबंधित मामलों की जांच करता है।
ऐसी एजेंसी के कर्मचारियों पर जांच में राहत दिलाने के बदले रिश्वत लेने का आरोप लगना संस्थागत जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
इस मामले में सीबीआई की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत की मांग व्यक्तिगत स्तर पर हुई थी या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क मौजूद था।
प्रकाशित: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 6:51 PM IST

