नई दिल्ली, 24 अक्टूबर 2026। दिल्ली सरकार ने राजधानी के शेष 48 ग्रामीण गांवों को शहरी क्षेत्र में शामिल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली सरकार ने इन गांवों को शहरी दर्जा देने का फैसला किया है। इससे सड़क, पेयजल, सीवरेज, जल निकासी और अन्य नागरिक सुविधाओं के सुनियोजित विकास का रास्ता तैयार होगा।
दिल्ली सरकार के शहरी विकास विभाग ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर को दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 की धारा 507(ए) के तहत अधिसूचना जारी की। इसे दिल्ली राजपत्र में प्रकाशन के लिए सामान्य प्रशासन विभाग को भेज दिया गया है।
दिल्ली के सभी 357 गांवों का शहरीकरण करने की योजना राजधानी में कुल 357 गांवों में से 309 को पहले ही शहरी दर्जा दिया जा चुका है। शेष 48 गांव अब तक ग्रामीण श्रेणी में थे।
इनमें से कई गांव तेजी से विकसित हो रहे आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों से घिरे हुए हैं। इसके बावजूद इनकी ग्रामीण कानूनी स्थिति के कारण भूमि उपयोग, निर्माण और विकास परियोजनाओं से संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं में कठिनाइयां आती रही हैं।
सरकार का कहना है कि शहरी दर्जा मिलने से इन क्षेत्रों में विकास की आवश्यकताओं का बेहतर आकलन किया जा सकेगा और संबंधित सरकारी एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ेगा।
किन गांवों को मिलेगा शहरी दर्जा? इस फैसले में उत्तरी, उत्तर-पश्चिमी, दक्षिण-पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली समेत विभिन्न इलाकों के गांव शामिल हैं।
नरेला और बवाना क्षेत्र में बकौली, हमीदपुर, पल्ला, कुलकपुर, सिंघोला, ताजपुर कलां, राजपुर कलां, औचंदी, मुंगेशपुर और शाहपुर गढ़ी जैसे गांव शामिल किए गए हैं।
वहीं, नजफगढ़ और बिजवासन क्षेत्र में ढांसा, रावता, झटीकरा, कांगनहेड़ी, घुम्मनहेड़ा, शिकारपुर, ईसापुर, कैर, बाकरगढ़, गालिबपुर तथा मुंडेला कलां और मुंडेला खुर्द शामिल हैं।
दक्षिणी दिल्ली में फतेहपुर बेरी और चंदन होला सहित अन्य गांव भी इस प्रक्रिया के दायरे में आएंगे।
जमीन और मकान मालिकों के लिए क्या बदलेगा? शहरी दर्जा मिलने के बाद संबंधित गांवों में भूमि उपयोग और निर्माण संबंधी नियमों की कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
इसके साथ ही दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) की नियोजन व्यवस्था के तहत भविष्य की आवासीय, व्यावसायिक और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर विचार किया जा सकेगा।
हालांकि, शहरी दर्जा मिलने का मतलब यह नहीं है कि जमीन पर तत्काल फ्लैट, दुकान या व्यावसायिक इमारत बनाने की अनुमति मिल जाएगी।
निर्माण कार्य और भूमि उपयोग में बदलाव के लिए निर्धारित भवन नियमों, स्वीकृत योजनाओं तथा संबंधित विभागों की अनुमति का पालन करना होगा।
सड़कों, सीवर और जलापूर्ति पर रहेगा जोर सरकार के अनुसार, इन गांवों को शहरी नियोजन व्यवस्था में शामिल करने से आंतरिक सड़कों, जल निकासी, सीवरेज, पेयजल आपूर्ति, सफाई और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का विकास अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार का उद्देश्य दिल्ली के गांवों की सांस्कृतिक पहचान और विरासत को सुरक्षित रखते हुए उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है।
हालांकि, वास्तविक विकास कार्यों के लिए अलग से योजनाओं की स्वीकृति, बजट आवंटन और कार्यान्वयन की आवश्यकता होगी।
पहले DDA और MCD ने दी थी मंजूरी इन 48 गांवों के शहरीकरण का प्रस्ताव नया नहीं है।
दिल्ली विकास प्राधिकरण ने फरवरी 2026 में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बाद दिल्ली नगर निगम में भी प्रस्ताव को स्वीकृति मिली।
अब दिल्ली सरकार ने 23 अक्टूबर को संबंधित अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशन के लिए भेजी है।
राजपत्र में प्रकाशन और आवश्यक वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद इन गांवों की शहरी स्थिति को लेकर औपचारिक स्पष्टता आएगी।
प्रकाशित: शनिवार, 24 अक्टूबर 2026 | 2:27 PM IST

