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दशहरे पर पीएम मोदी का संदेश: एकता और संस्कृति विरोधी ताकतों के खिलाफ एकजुट हों

प्रधानमंत्री ने विजयादशमी पर देश की एकता, सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा का आह्वान किया।

रावण का पुतला जल रहा है, जिसमें कई लोग और एक बड़ा झूला दिख रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में दशहरा समारोह में भाग लिया और देश की एकता पर जोर दिया।
मुख्य बातें

दशहरे के अवसर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा पर जोर दिया, और देश के मान-सम्मान को नुकसान पहुँचाने वाली, समाज में विभाजन पैदा करने वाली, तथा भारतीय संस्कृति के प्रति नफरत फैलाने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान किया।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने दिल्ली में दशहरा समारोह में भाग लिया और रावण दहन के बाद संबोधित किया।
  • उन्होंने देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा पर जोर दिया।
  • मोदी ने भारत के मान-सम्मान को नुकसान पहुँचाने वाली, समाज में विभाजन पैदा करने वाली और भारतीय संस्कृति के प्रति नफरत फैलाने वाली ताकतों को देश के लिए खतरा बताया।
  • उन्होंने रामराज्य की अवधारणा को न्याय और समान अवसर से जोड़ा, जिसमें गरीब और वंचित वर्गों का कल्याण शासन की प्राथमिकता हो।
  • प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए देशवासियों से एकजुटता और अपनी क्षमताओं पर भरोसा करने की अपील की।
  • प्रधानमंत्री की उपस्थिति के कारण दिल्ली में दशहरा समारोह स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

नई दिल्ली: विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन स्थित डीडीए उत्सव ग्राउंड में आयोजित दशहरा समारोह में हिस्सा लिया। रावण दहन के बाद अपने संबोधन में उन्होंने देश की एकता, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के सामने मौजूद चुनौतियों का मुकाबला सभी को मिलकर करना होगा।

देश के सामने तीन बड़ी चुनौतियों का किया जिक्र प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में तीन प्रकार की प्रवृत्तियों को देश के लिए खतरा बताया। इनमें भारत के मान-सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें, समाज में विभाजन पैदा करने वाले लोग और भारतीय संस्कृति के प्रति नफरत फैलाने वाली सोच शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि देशहित से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों और संस्थाओं को एकजुट होकर काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने इन चुनौतियों को विजयादशमी के बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश से जोड़कर प्रस्तुत किया।

रामराज्य का अर्थ सबके लिए न्याय और समान अवसर प्रधानमंत्री ने भगवान राम के जीवन और आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि रामराज्य की अवधारणा ऐसे शासन से जुड़ी है, जिसमें भेदभाव न हो और प्रत्येक नागरिक को न्याय एवं आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

उन्होंने गरीब और वंचित वर्गों के कल्याण को शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी बताया। उनके अनुसार, सत्ता का उद्देश्य केवल शासन करना नहीं, बल्कि जनसेवा और समाज के कमजोर वर्गों का उत्थान होना चाहिए।

आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर अपने संबोधन में मोदी ने देशवासियों से आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में केवल बाहरी सहायता पर निर्भर रहने के बजाय देश को अपनी क्षमताओं, संसाधनों और सामूहिक प्रयासों पर भरोसा करना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों को भगवान राम के जीवन से मिलने वाली प्रेरणा के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि संकल्प, मेहनत और एकजुटता के जरिए बड़ी चुनौतियों का समाधान निकाला जा सकता है।

दिल्ली में सुरक्षा के कड़े इंतजाम प्रधानमंत्री की उपस्थिति को देखते हुए पूर्वी दिल्ली के आयोजन स्थल और आसपास के क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।

सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए दिल्ली पुलिस तथा केंद्रीय सशस्त्र बलों के करीब 2,500 जवानों की तैनाती की योजना बनाई गई थी। आयोजन स्थल के आसपास यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन की व्यवस्था भी की गई थी।

देश के अन्य हिस्सों में भी विजयादशमी का त्योहार रामलीला, धार्मिक आयोजनों और रावण दहन के साथ मनाया गया।

प्रकाशित: मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 | 8:13 PM IST

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