दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को मतदान के बीच Delhi High Court ने चुनाव प्रचार के दौरान सामने आई हिंसा, वाहनों के काफिलों और चुनावी नियमों के कथित उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने शनिवार को नतीजे घोषित होने के बाद किसी भी तरह का विजय जुलूस निकालने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। यह आदेश दिल्ली की सड़कों के साथ विश्वविद्यालय परिसर और हॉस्टलों में भी लागू होगा।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने निर्देश दिया कि कोई उम्मीदवार, छात्र संगठन, समर्थक या अन्य व्यक्ति परिणाम आने के बाद विजय जुलूस नहीं निकालेगा। आदेश का उल्लंघन होने पर आपराधिक और प्रशासनिक कार्रवाई के साथ अदालत की अवमानना की कार्यवाही भी हो सकती है। दिल्ली पुलिस को आदेश का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है।
अदालत ने DUSU चुनाव लड़ रहे सभी 140 उम्मीदवारों और संबंधित छात्र संगठनों को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश भी दिया है। कोर्ट इस बात पर विचार करेगा कि चुनाव प्रचार के दौरान Lyngdoh Committee की सिफारिशों और पूर्व न्यायिक आदेशों के कथित उल्लंघन के लिए उम्मीदवारों तथा छात्र संगठनों पर उदाहरणात्मक चुनावी हर्जाना क्यों न लगाया जाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों और बड़े कार काफिलों पर भी सवाल उठाए। दिल्ली पुलिस की ओर से अदालत को बताया गया कि चुनाव से जुड़े मामलों में FIR दर्ज की गई हैं, वाहन जब्त किए गए हैं और गिरफ्तारियां भी हुई हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई को गंभीरता से उसके तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाया जाए।
इससे पहले गुरुवार को हाईकोर्ट ने चेतावनी दी थी कि यदि अधिकारियों की कार्रवाई संतोषजनक नहीं मिली तो वह मतगणना और नतीजों की घोषणा तक रोक सकता है। शुक्रवार की सुनवाई में अदालत ने विजय जुलूस पर स्पष्ट प्रतिबंध सहित नए निर्देश जारी किए।
इस बीच DUSU के चार केंद्रीय पदों के लिए मतदान आज दो पालियों में हो रहा है। करीब 1.5 लाख विद्यार्थी मतदान के पात्र हैं और मतगणना 19 सितंबर को प्रस्तावित है। प्रमुख मुकाबला ABVP, NSUI और AISA-SFI गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच है।

