अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े नए प्रतिबंध कानून H.R. 5334 पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। व्हाइट हाउस के अनुसार “Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026” अब कानून बन चुका है। इसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा और रक्षा क्षेत्रों तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले नेटवर्क पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि भारतीय सामान पर आज से 100 प्रतिशत नया अमेरिकी टैरिफ लग गया है। नए कानून में प्रशासन को यह निर्धारित करने का अधिकार दिया गया है कि किन देशों को इसके दायरे में लाया जाए और वास्तविक शुल्क कितनी दर से लागू हो। कानून में राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कुछ उपायों से छूट देने का विकल्प भी मौजूद है।
कानून के तहत पिछले 12 महीनों में रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के सबसे बड़े खरीदारों में शामिल देशों पर कार्रवाई की जा सकती है। रिपोर्टिंग के मुताबिक संबंधित शुल्क व्यवस्था आने वाले 30 दिनों में आगे बढ़ सकती है, लेकिन अंतिम सूची और भारत पर वास्तविक प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है।
भारत ने कानून पारित होने के बाद अमेरिका से पहले ही कहा था कि उसकी प्राथमिकता 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा है। नई दिल्ली ने चेतावनी दी थी कि रूसी तेल खरीद से जुड़े व्यापक अमेरिकी शुल्क भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
यह मामला भारत के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका भारतीय निर्यात के सबसे बड़े बाजारों में शामिल है, जबकि रूस भारत के प्रमुख कच्चे तेल आपूर्तिकर्ताओं में है। ऐसे में रूसी तेल खरीद जारी रखने और अमेरिकी बाजार तक निर्यात पहुंच बनाए रखने के बीच संतुलन आने वाले हफ्तों में भारत की व्यापार और ऊर्जा नीति का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकता है।

