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H-1B वीज़ा पर $100,000 भुगतान नियम 2027 तक बढ़ा

ट्रंप प्रशासन ने H-1B वीज़ा के लिए $100,000 भुगतान की शर्त एक साल और बढ़ाई।

झटपट समझें

अमेरिका ने H-1B वीज़ा कार्यक्रम से जुड़े $100,000 भुगतान प्रतिबंध को 21 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों की रक्षा करना है। यह प्रतिबंध मुख्य रूप से अमेरिका के बाहर से आने वाले H-1B specialty-occupation कर्मचारियों पर लागू होता है।

मुख्य बातें

  • H-1B वीज़ा पर $100,000 भुगतान का नियम 21 सितंबर 2027 तक बढ़ाया गया है।
  • यह प्रतिबंध उन H-1B specialty-occupation कर्मचारियों पर लागू होता है जो अमेरिका के बाहर हैं।
  • मौजूदा H-1B वीज़ा धारकों पर यह नई भुगतान शर्त सीधे लागू नहीं होती है।
  • इस फैसले से भारतीय पेशेवरों और आईटी कंपनियों पर विशेष प्रभाव पड़ सकता है।
  • व्हाइट हाउस का उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के दुरुपयोग को सीमित करना और अमेरिकी नौकरियों की रक्षा करना है।
  • जून 2026 में एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने इस शुल्क को गैरकानूनी बताया था, मामला अपील में है।
H-1B वीज़ा पर $100,000 शुल्क नियम 1 साल के लिए और बढ़ा, अब 21 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा प्रतिबंध।
H-1B वीज़ा कार्यक्रम से जुड़े $100,000 भुगतान प्रतिबंध का विस्तार।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा कार्यक्रम से जुड़े $100,000 भुगतान वाले प्रतिबंध को एक साल और बढ़ा दिया है। व्हाइट हाउस की 18 सितंबर की नई उद्घोषणा के अनुसार मौजूदा व्यवस्था अब 21 सितंबर 2027 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है।

यह व्यवस्था सभी H-1B धारकों पर सामान्य वार्षिक फीस नहीं है। व्हाइट हाउस के आदेश के अनुसार प्रतिबंध मुख्य रूप से उन H-1B specialty-occupation कर्मचारियों की अमेरिका में एंट्री और संबंधित petitions से जुड़ा है जो अमेरिका के बाहर हैं, और जिनकी petition के साथ $100,000 का भुगतान नहीं किया गया है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग राष्ट्रीय हित के मामलों में व्यक्ति, कंपनी या पूरे उद्योग को अपवाद दे सकता है।

Reuters के अनुसार मौजूदा H-1B वीजा धारकों तथा अमेरिका में पहले से मौजूद कुछ विदेशी स्नातकों पर यह नई भुगतान शर्त उसी तरह लागू नहीं होती जैसे बाहर से आने वाले नए प्रभावित आवेदनों पर होती है। इसलिए इसे हर H-1B कर्मचारी के लिए सीधे $100,000 की नई फीस समझना सही नहीं होगा।

इस फैसले का भारतीय पेशेवरों और आईटी कंपनियों पर विशेष ध्यान इसलिए है क्योंकि H-1B कार्यक्रम लंबे समय से भारतीय तकनीकी कर्मचारियों की अमेरिकी नियुक्तियों का प्रमुख माध्यम रहा है। अधिक लागत के कारण कंपनियां अमेरिका के बाहर से कर्मचारियों को H-1B पर लाने की रणनीति पर दोबारा विचार कर सकती हैं। Reuters के मुताबिक पिछले साल नियम आने के बाद कुछ कंपनियों ने भारत सहित विदेशी बाजारों में अपनी भर्ती और संचालन रणनीति में बदलाव भी शुरू किया था।

व्हाइट हाउस का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य H-1B कार्यक्रम के कथित दुरुपयोग को सीमित करना और अमेरिकी कर्मचारियों की नौकरियों की रक्षा करना है। प्रशासन के अनुसार सितंबर 2025 में मूल नियम लागू होने के बाद $100,000 भुगतान के साथ 700 से अधिक petitions दाखिल की गईं। ये प्रशासन द्वारा दिए गए आंकड़े और तर्क हैं।

हालांकि नीति की कानूनी स्थिति भी महत्वपूर्ण है। जून 2026 में एक अमेरिकी संघीय न्यायाधीश ने $100,000 शुल्क को गैरकानूनी बताया था। मामला अपील प्रक्रिया में है, इसलिए राष्ट्रपति द्वारा अवधि बढ़ाने के बावजूद इसकी अंतिम कानूनी स्थिति अदालतों के फैसलों से भी प्रभावित हो सकती है।

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