₹2,000 से अधिक के चुनिंदा UPI मर्चेंट भुगतान पर नया Merchant Discount Rate (MDR) लागू होने से पहले पेट्रोल पंप संचालकों का विरोध तेज हो गया है। राजस्थान के अलवर में कुछ पेट्रोल पंप और CNG स्टेशनों पर ग्राहकों से नकद भुगतान को प्राथमिकता देने वाले पोस्टर लगाए गए हैं, जबकि महाराष्ट्र, झारखंड और अन्य राज्यों के डीलर भी शुल्क से छूट की मांग कर रहे हैं।
नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। सामान्य पात्र person-to-merchant UPI भुगतान में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर 0.4% MDR रहेगा, लेकिन ईंधन, रेलवे, दूरसंचार, बीमा और कृषि इनपुट जैसे कुछ कम-मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर फ्लैट ₹5 MDR तय किया गया है। पेट्रोल पंप पर यह शुल्क ग्राहक से नहीं, मर्चेंट यानी पंप संचालक से लिया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि ग्राहकों के लिए UPI भुगतान पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं होगा। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P ट्रांसफर भी पहले की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। सरकार के अनुसार लगभग 96% merchant UPI transactions नई MDR व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
इसके बावजूद पेट्रोल डीलरों का कहना है कि ईंधन कारोबार में उनका मार्जिन पहले से सीमित है और प्रत्येक पात्र डिजिटल ट्रांजैक्शन पर अतिरिक्त ₹5 का खर्च उनके संचालन पर असर डाल सकता है। मुंबई के पेट्रोल पंप संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें राहत नहीं मिली तो वे 15 अक्टूबर के बाद UPI स्वीकार करना बंद करने पर विचार कर सकते हैं। महाराष्ट्र के डीलर इस मुद्दे पर 27 सितंबर को बैठक करने वाले हैं।
इसी तरह गाजियाबाद में कुछ व्यापारियों ने भी 15 अक्टूबर के बाद नकद भुगतान को प्राथमिकता देने संबंधी नोटिस लगाने शुरू कर दिए हैं। इससे संकेत मिलता है कि UPI MDR का विरोध केवल पेट्रोलियम क्षेत्र तक सीमित नहीं है और अधिक मूल्य वाले डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले अन्य खुदरा कारोबार भी इसकी लागत को लेकर चिंतित हैं।
हालांकि यह कहना सही नहीं होगा कि देशभर के पेट्रोल पंपों ने अभी से UPI बंद कर दिया है। फिलहाल अलग-अलग शहरों में विरोध, चेतावनी और नकद भुगतान को बढ़ावा देने के उदाहरण सामने आए हैं। नई शुल्क व्यवस्था 15 अक्टूबर से प्रभावी होगी और तब तक डीलर संगठनों तथा सरकार के बीच बातचीत जारी रहने की संभावना है।

