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दवाओं की भारी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र ने माना समस्या गंभीर, 16% रिटेल मार्जिन के व्यापक इस्तेमाल पर विचार

नई दिल्ली: महंगी दवाओं से मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर Supreme Court of India में चल रही सुनवाई में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।

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नई दिल्ली: महंगी दवाओं से मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर Supreme Court of India में चल रही सुनवाई में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।

मुख्य बातें

  • नई दिल्ली: महंगी दवाओं से मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर Supreme Court of India में चल रही सुनवाई में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है।
  • केंद्र सरकार ने अदालत के सामने स्वीकार किया कि दवाओं की अत्यधिक कीमतों की समस्या मौजूद है और कहा कि वह अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर इसका समाधान तलाशेगी।
  • जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ दवाओं के price regulation, generic prescriptions और medicines तथा medical devices की कीमतों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
दवाओं की कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार समाधान पर विचार करेगी।
दवाओं की भारी कीमतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र ने माना समस्या गंभीर, 16% रिटेल मार्जिन के व्यापक इस्तेमाल पर विचार

नई दिल्ली: महंगी दवाओं से मरीजों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर Supreme Court of India में चल रही सुनवाई में महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। केंद्र सरकार ने अदालत के सामने स्वीकार किया कि दवाओं की अत्यधिक कीमतों की समस्या मौजूद है और कहा कि वह अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर इसका समाधान तलाशेगी।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ दवाओं के price regulation, generic prescriptions और medicines तथा medical devices की कीमतों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने सवाल उठाया कि कुछ निर्धारित दवाओं की कीमत नियंत्रित होने के बावजूद बड़ी संख्या में अन्य medicines पर वही सुरक्षा क्यों उपलब्ध नहीं है।

सुनवाई में सबसे अधिक ध्यान उस उदाहरण पर गया जिसमें एक आवश्यक cancer medicine की Price to Retailer करीब ₹2,700 बताई गई, जबकि मरीज के लिए उस पर ₹27,000 MRP अंकित थी। यानी एक खरीद पर अंतर करीब ₹24,300 बैठता है। अदालत ने इस तरह के भारी अंतर पर गंभीर चिंता जताई। हालांकि यह उदाहरण सभी cancer medicines या सभी pharmacies की pricing को दर्शाता नहीं है।

केंद्र की ओर से Solicitor General Tushar Mehta ने अदालत को बताया कि सरकार इस मुद्दे पर विरोधात्मक रुख नहीं अपना रही है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों के साथ आगे विचार-विमर्श के लिए समय मांगा और कहा कि ऐसा समाधान तलाशना होगा जिसमें अलग-अलग पक्षों के हितों का संतुलन हो।

अदालत ने मौजूदा drug-price framework में इस्तेमाल होने वाले 16% retailer margin पर भी चर्चा की। Drugs (Prices Control) Order, 2013 के तहत scheduled formulations की ceiling price निर्धारित करते समय National Pharmaceutical Pricing Authority औसत Price to Retailer के साथ 16% retailer margin को calculation में शामिल करती है। पीठ ने पूछा कि इसी सिद्धांत को अधिक व्यापक स्तर पर क्यों नहीं अपनाया जा सकता।

लेकिन फिलहाल मरीजों के लिए सभी दवाओं पर 16% का कोई नया सार्वभौमिक cap लागू नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर अंतिम आदेश नहीं दिया है; यह अभी विचाराधीन प्रस्ताव है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 23 जुलाई 2026 तक NPPA ने 935 scheduled formulations के ceiling prices तय किए थे। National List of Essential Medicines 2022 में 29 therapeutic categories की 388 medicines शामिल हैं। वहीं non-scheduled formulations पर अलग नियम लागू होते हैं और निर्माता उनका MRP पिछले 12 महीनों के स्तर से 10% से अधिक नहीं बढ़ा सकते।

अदालत ने hospital pharmacies की भूमिका पर भी सवाल उठाया है। पीठ की चिंता यह है कि भर्ती मरीज को यदि अस्पताल के भीतर से ही दवा या medical device खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, तो उसके पास बाजार में कम कीमत तलाशने का व्यावहारिक विकल्प सीमित हो सकता है।

मामले का सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं से भी संबंध है। अदालत ने कहा कि inflated MRP का असर केवल मरीज की जेब पर नहीं पड़ता; सरकारी योजनाओं के तहत reimbursement होने पर इसका भार करदाताओं के पैसे पर भी आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर 2026 के लिए तय की है। तब तक केंद्र से संभावित समाधान पर अपना रुख स्पष्ट करने की उम्मीद है।

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