भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराने की योजना को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी की अध्यक्षता में मंगलवार, 13 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।
पांच वर्ष की इस योजना पर करीब ₹284.07 करोड़ खर्च होंगे और इस अवधि में लगभग 28.7 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने का अनुमान है। राज्य सरकार का उद्देश्य परिवारों पर शिक्षा का आर्थिक बोझ कम करना और माध्यमिक स्तर पर पढ़ाई छोड़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या घटाना है।
किन विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ?
नई व्यवस्था के अंतर्गत नौवीं और दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों के विद्यार्थियों को मुफ्त किताबें दी जाएंगी।
वर्तमान व्यवस्था में पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों और नौवीं-दसवीं के अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को पहले से मुफ्त पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जाती हैं। कैबिनेट के नए फैसले से यह सुविधा माध्यमिक कक्षाओं के बाकी विद्यार्थियों तक भी बढ़ाई जाएगी।
यह योजना वित्त वर्ष 2025-26 से 2029-30 तक की पांच वर्षीय अवधि के लिए स्वीकृत की गई है। स्कूल एवं जनशिक्षा विभाग किताबों की छपाई, खरीद, ढुलाई और वितरण की व्यवस्था करेगा। सरकार ने प्रत्येक शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले किताबें स्कूलों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
जलभराव से निपटने के लिए ₹500 करोड़ की योजना भी मंजूर
इसी कैबिनेट बैठक में राज्य के शहरी इलाकों में बारिश के पानी की निकासी सुधारने के लिए ₹500 करोड़ के कार्यक्रम को भी स्वीकृति मिली।
सरकार का उद्देश्य जलभराव और स्थानीय बाढ़ की समस्या को कम करना है। बैठक में कुल 11 विभागों से जुड़े 16 प्रस्ताव मंजूर किए गए, जिनमें युवाओं के कौशल विकास, कृषि, सिंचाई और सरकारी सेवाओं से संबंधित निर्णय भी शामिल हैं।
शिक्षा पर क्या पड़ेगा असर?
किताबों की लागत कम होने से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को माध्यमिक शिक्षा जारी रखने में मदद मिल सकती है। विशेष रूप से आठवीं के बाद नौवीं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए यह राहत उपयोगी हो सकती है।
हालांकि, योजना की स्वीकृति का अर्थ यह नहीं है कि सभी स्कूलों में किताबें वितरित हो चुकी हैं। वास्तविक लाभ विभाग की वितरण व्यवस्था और समय पर किताबें पहुंचने पर निर्भर करेगा।

