जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में फिर से बवाल शुरू हो गया है। स्थिति को काबू में करने के लिए प्रोटेस्ट कर रहे कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आज छात्रसंघ चुनाव का ऐलान हो गया है फिर ये बवाल किसलिए? आखिर छात्रों के बीच किस बात पर असंतोष बना हुआ है। इस सिलसिले में आंदोलनकारी छात्रों ने कुलपति मजहर आसिफ को चिट्ठी लिखकर अपनी बात पहुंचाई है। दरअसल, विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को चुनाव कराने के जिन बिंदुओं पर सहमति जताई है। अब छात्रों ने इसमें संशोधन की मांग करी है। अब दूसरा सवाल यह है, आखिर छात्रों की नई मांगे क्या हैं?
छात्रों का कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। साथ ही, आंदोलन से जुड़े सभी छात्रों को राहत देने और सार्वजनिक माफी की शर्त हटाने की उनकी मांगें भी पूरी नहीं हुई हैं। 12 अक्टूबर से भूख हड़ताल कर रहे पांच छात्रों में से दो ने कहा है कि वे आदेश में स्पष्टता नहीं होने के कारण अपना आंदोलन जारी रखेंगे। छात्रों और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच करीब दो सप्ताह से जारी गतिरोध के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा कर्मचारियों के बीच झड़पें भी हुई थीं।
छात्रों की 5 मांगे अभी भी नहीं हुईं पूरी
संविधान को मंजूरी देने की समयसीमा तय हो। 20 दिसंबर तक छात्रसंघ का संविधान तैयार करने के साथ उसे मंजूरी देने की समयसीमा भी स्पष्ट की जाए।
चुनाव की अधिसूचना 15 दिनों के भीतर जारी हो। संविधान की मंजूरी के बाद 15 दिन के भीतर चुनाव का नोटिफिकेशन जारी करने का वादा किया जाए।
सभी अनुशासनात्मक कार्रवाइयां वापस हों। निलंबन और कारण बताओ नोटिस के अलावा कैंपस में प्रवेश पर प्रतिबंध और निष्कासन जैसी कार्रवाइयां भी वापस ली जाएं।
सार्वजनिक माफी की शर्त हटे। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन के खिलाफ कथित मानहानिकारक बयान, कार्रवाई या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस करके माफी देने की शर्त छात्र स्वीकार नहीं कर रहे हैं।
मुख्य सुरक्षा सलाहकार इस्तीफा दें। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कर्मचारियों की भूमिका को लेकर छात्र मुख्य सुरक्षा सलाहकार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
प्रशासन बोला- नियमों के तहत बनेगा संविधान
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि छात्रसंघ का संविधान जल्दबाजी में तैयार नहीं किया जा सकता। इसमें विश्वविद्यालय अधिनियम, यूजीसी के लागू नियमों, अदालतों के फैसलों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों को ध्यान में रखना होगा। संविधान को मंजूरी मिलने के बाद मतदाता सूची तैयार की जाएगी और फिर चुनाव की घोषणा होगी।
प्रशासन ने 21 अक्टूबर को सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन प्रो. जुबैर मीनाई की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति को छात्रसंघ के वर्ष 2006 में भंग होने की परिस्थितियों, संबंधित अदालती फैसलों और लिंगदोह समिति की सिफारिशों की समीक्षा कर 20 दिसंबर तक संविधान का मसौदा सौंपना है।
प्रकाशित: सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 | 5:40 PM IST

