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DMRC ने SC से बिना शर्त माफी मांगी; बताया- CJP के प्रदर्शन वाले दिन मेट्रो सेवाओं में नहीं की थी कोई कटौती

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका के जवाब में एक हलफनामा दाखिल करते बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ…

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दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका के जवाब में एक हलफनामा दाखिल करते बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई थीं।

मुख्य बातें

  • दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका के जवाब में एक हलफनामा दाखिल करते बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ…
  • DMRC की चेयरपर्सन डी.
  • थारा (IAS) की तरफ से दायर हलफनामे में बताया गया कि 10 अक्टूबर को CJP के प्रोटेस्ट के दिन मेट्रो के किसी रूट पर कोई ट्रेन रद्द नहीं की गई थी, हालांकि 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी पाबंदी जरूर…
DMRC ने SC से बिना शर्त माफी मांगी; बताया- CJP के प्रदर्शन वाले दिन मेट्रो सेवाओं में नहीं की थी कोई कटौती
DMRC ने SC से बिना शर्त माफी मांगी; बताया- CJP के प्रदर्शन वाले दिन मेट्रो सेवाओं में नहीं की थी कोई कटौती

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका के जवाब में एक हलफनामा दाखिल करते बिना शर्त माफी मांगी और बताया कि राष्ट्रीय राजधानी में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हाल ही में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान मेट्रो सेवाओं में कोई कटौती नहीं की गई थीं। DMRC की चेयरपर्सन डी. थारा (IAS) की तरफ से दायर हलफनामे में बताया गया कि 10 अक्टूबर को CJP के प्रोटेस्ट के दिन मेट्रो के किसी रूट पर कोई ट्रेन रद्द नहीं की गई थी, हालांकि 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी पाबंदी जरूर लगाई गई थी। इस दौरान DMRC प्रमुख इस हलफनामे की शुरुआत में ही अदालत से 'बिना शर्त माफी' भी मांगी।

लाइल लॉ की एक रिपोर्ट के अनुसार अपने हलफनामे में DMRC ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो नेटवर्क का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा (258 स्टेशन) यात्रियों के लिए पूरी तरह चालू और उपलब्ध था और 303 में से सिर्फ 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास पर पाबंदी लगाई गई थी, जो पूरे नेटवर्क का केवल 15 प्रतिशत हिस्सा है। इस हलफनामे में कहा गया कि प्रवेश और निकास से जुड़े दिशानिर्देश कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आकलन और उनके निर्देशों के अनुरूप लागू किए गए थे।

10 तारीख को 271 मेट्रो ट्रेनों ने लगाए थे कुल 4157 फेरे अपने हलफनामे में DMRC ने बताया कि 10 अक्टूबर को मेट्रो ट्रेन के फेरों (ट्रिप्स) की संख्या में कोई कमी नहीं की गई थी। इस दौरान कुल 271 ट्रेनें सेवा में लगाई गई थीं और किसी आम दिन की तरह 4,157 ट्रेनों के फेरे चलाए गए थे। हालांकि, दिल्ली पुलिस के निर्देशों के बाद 303 मेट्रो स्टेशनों में से 45 पर आने-जाने पर रोक लगा दी गई थी। DMRC ने बताया कि शुरू में 57 स्टेशनों के लिए पाबंदियां तय की गई थीं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद पुलिस ने सुरक्षा जरूरतों का दोबारा आकलन किया और यह संख्या घटाकर 45 कर दी गई।

10अक्टूबर को 32 लाख यात्रियों ने किया मेट्रो में सफर इसके अलावा DMRC ने बताया कि '10 अक्टूबर को मेट्रो में सफर करने वाले यात्रियों की संख्या लगभग 32 लाख थी, जबकि महीने के प्रत्येक दूसरे शनिवार को आमतौर पर यह संख्या करीब 58 लाख रहती है।' यात्रियों की संख्या में आई इस गिरावट के पीछे का अनुमान लगाते हुए DMRC ने कहा कि इसका कारण विरोध-प्रदर्शन हो सकता है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में यात्रियों ने सफ़र न करने का फैसला किया।'

रात 10 बजे हटा ली गई थी 45 स्टेशनों पर लगी पाबंदियां अदालत की अवमानना ​​की याचिका के जवाब में DMRC की तरफ से दायर इस हलफनामे में यह भी कहा गया है कि 10 अक्टूबर को रात 10 बजे से 45 स्टेशनों पर लगी पाबंदियां हटा ली गई थीं। इससे पहले 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने DMRC को इस बारे में अनुपालन रिपोर्ट पालन करने का आदेश दिया था। जिसके बाद उसी आदेश का पालन करते हुए DMRC ने यह रिपोर्ट दाखिल की।

SC ने DMRC को दिया था हलफनामा दाखिल करने का निर्देश इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी में 10 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन के मद्देनजर कई मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और दिल्ली आने वाली रेलगाड़ियों को रद्द किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए, न्यायालय ने केंद्र को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि मेट्रो परिचालन और राष्ट्रीय राजधानी आने वाली ट्रेनों की आवाजाही पर 'पूर्ण रोक' न लगे। प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने DMRC और अन्य को अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का भी निर्देश दिया था।

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