सच्ची खबरें • मज़बूत भारत
लाइव टीवी

RSS की रैलियों को क्यों नहीं दी अनुमति? थलपति विजय की पुलिस पर भड़का कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को थलपति विजय की तमिलनाडु पुलिस पर भड़क गया और सवाल किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों को जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवादी खतरों वाले इलाके में इजाजत दी…

झटपट समझें

मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को थलपति विजय की तमिलनाडु पुलिस पर भड़क गया और सवाल किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों को जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवादी खतरों वाले इलाके में इजाजत दी जाती है, तो फिर उन्हें तमिलनाडु जैसे शांतिपूर्ण राज्य में रैलियां करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है।

मुख्य बातें

  • मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को थलपति विजय की तमिलनाडु पुलिस पर भड़क गया और सवाल किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों को जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवादी खतरों वाले इलाके में इजाजत दी…
  • न्यायमूर्ति वी.
  • लक्ष्मीनारायण ने आरएसएस के प्रदेश सचिव जगदीसन की याचिका पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की पुलिस से यह सवाल किए।
RSS की रैलियों को क्यों नहीं दी अनुमति? थलपति विजय की पुलिस पर भड़का कोर्ट
RSS की रैलियों को क्यों नहीं दी अनुमति? थलपति विजय की पुलिस पर भड़का कोर्ट

मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को थलपति विजय की तमिलनाडु पुलिस पर भड़क गया और सवाल किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के कार्यक्रमों को जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवादी खतरों वाले इलाके में इजाजत दी जाती है, तो फिर उन्हें तमिलनाडु जैसे शांतिपूर्ण राज्य में रैलियां करने की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायण ने आरएसएस के प्रदेश सचिव जगदीसन की याचिका पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु की पुलिस से यह सवाल किए।

जगदीसन ने याचिका में मांग की थी कि पुलिस को निर्देश दिया जाए कि वे तमिलनाडु में 18 या 25 अक्टूबर या 1 नवंबर को रैलियां करने की इजाज़त दें। उन्होंने कहा कि रैलियों की इजाजत के लिए पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आवेदन दिया गया था। उन्होंने कोई जवाब नहीं मिलने पर इन कार्यक्रमों के लिए पुलिस से मंज़ूरी दिलाने के निर्देश के लिए उच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एनएल राजा ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अधिकारियों को हर साल आरएसएस रैलियों की इजाजत देने का निर्देश दिया था और उच्चतम न्यायालय ने भी इस आदेश को बरकरार रखा था। उन्होंने तर्क दिया कि इसके बावजूद इजाज़त देने से इनकार किया जाता रहा है।

पुलिस की ओर से पेश महाधिवक्ता विजय नारायण ने कहा कि आवेदन कम से कम 21 दिन पहले दिये जाने चाहिए, जबकि इस मामले में अनुरोध सिर्फ 03 अक्टूबर को किया गया था। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि प्रस्तावित रास्ते उन इलाकों में आते हैं जहां इजाजत नहीं दी जा सकती और त्योहारों के मौसम में रैलियों की इजाजत देने से जनता को परेशानी हो सकती है।

न्यायाधीश ने सवाल किया कि न्यायालय के पिछले निर्देशों के बावजूद इजाज़त क्यों नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता में चाहे कोई भी पार्टी हो, आरएसएस रैलियों पर पाबंदियां लगती रही हैं। उन्होंने गौर किया कि मौजूदा सरकार के तहत द्रविड़ कड़गम, द्रमुक, अन्नाद्रमुक और आरएसएस को भी इजाजत देने से इनकार किया जा रहा है।

न्यायाधीश ने जम्मू-कश्मीर का जिक्र करते हुए पूछा कि आतंकवादी खतरों वाले इलाके में आरएसएस रैलियों की इजाज़त दी जाती है, लेकिन तमिलनाडु में अनुमति देने से इनकार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इजाज़त न देने से सरकार उस संगठन को बेवजह प्रचार दे सकती है। न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता और उनके अधिवक्ता को इस मामले पर सरकारी मुख्य आपराधिक वकील आर जॉन सत्यन से बातचीत करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए इसे गुरुवार तक के लिए स्थगित कर दिया।

यह खबर शेयर करें

WhatsAppXFacebook