गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला (86 साल) के उस बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि पटेल, बनिया या ब्राह्मण समुदाय के जो लोग मैला ढोने का काम करेंगे, उन्हें मैं 50 हजार रुपए महीना दूंगा। वाघेला ने शुक्रवार को गांधी जयंती के मौके पर नर्मदा जिले के आदिवासी बहुल सागबारा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की थी। इस दौरान राज्यसभा के पूर्व सदस्य आरक्षण के समर्थन में बोल रहे थे और उन लोगों की आलोचना कर रहे थे जो इसे खत्म करना चाहते हैं। उनके इस बयान पर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने तीखी आपत्ति जताई है और वाघेला पर जातिवाद को बढ़ावा देने और समाज में वैमनस्य पैदा करने का आरोप लगाया है।
इस आयोजन के दौरान पटेल, बनिया और ब्राह्मण समुदाय के लोगों को मैला ढोने का काम करने की चुनौती देते हुए वाघेला ने कहा था, 'आरक्षण किसी की कृपा से नहीं दिया गया है, बल्कि यह पीढ़ियों तक झेले गए कष्टों और संघर्षों से हासिल हुए है।'
'इन लोगों का मल-मूत्र साफ करने के बदले दूंगा 50k रुपए महीना' पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा था, 'मैं आरक्षण विरोधी उन सभी लोगों से कहना चाहता हूं, कि चाहे आप पटेल हों, बनिया हों या ब्राह्मण हों, अगर आप हाथ से मैला उठाने का काम करने को तैयार हैं, तो इन लोगों का मल-मूत्र साफ करने के लिए मैं आपको 50 हजार रुपए महीना वेतन दूंगा। अगर आप आदिवासी समुदायों की तरह की परिस्थितियों में रहें, तभी आपको उनकी वास्तविक स्थिति का एहसास होगा।'
वाघेला ने आरक्षण को बरसों के अन्याय की भरपाई का तरीका बताया वाघेला ने कहा कि आरक्षण बरसों के अन्याय की भरपाई का एक तरीका है। वाघेला का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अटकलें हैं कि वह एक बार फिर कांग्रेस में शामिल हो सकते हैं। उधर वाघेला के इस बयान को लेकर सामान्य वर्ग से आने वाले कई भाजपा नेता भड़क गए हैं। वाघेला पर निशाना साधते हुए भाजपा नेता और पार्टी के प्रमुख ब्राह्मण चेहरों में शामिल यज्ञेश दवे ने कहा कि समुदायों या जातियों के बीच वैमनस्य पैदा करना ठीक नहीं है।
भाजपा के ब्राह्मण नेता बोले- सालों पहले खत्म हुई मैला ढोने की प्रथा दवे ने संवाददाताओं से कहा कि वाघेला जिस मैला ढोने की प्रथा की बात कर रहे थे, वह देश में पहले ही समाप्त की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि पिछली और मौजूदा सरकारों ने यह सुनिश्चित करने के लिए काम किया है कि इस समुदाय के लोग सम्मान के साथ जीवन जी सकें और उन्हें न्याय मिल सके।
भाजपा नेता ने दिया 5 लाख रुपए महीना देने का ऑफर दवे ने वाघेला पर निशाना साधते हुए कहा, 'ब्राह्मण, पटेल और बनिया समुदाय के लोगों को मैला ढोने का काम करने पर 50,000 रुपए देने की उनकी बात बिल्कुल गलत है। मेरा तो उनसे कहना है कि इस नेक काम की शुरुआत उन्हें अपने ही समुदाय से करनी चाहिए। आप खुद इसकी शुरुआत करें। मेरे घर का कचरा साफ करें, मैं आपको हर महीने पांच लाख रुपए दूंगा।' भाजपा नेता ने कहा कि वाघेला को इस तरह की राजनीतिक बयानबाजी के नतीजों पर विचार करना चाहिए, क्योंकि ब्राह्मण समुदाय को उकसाने वाली ऐसी टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
वाघेला ने कहा था- अगर यह सरकार बेकार, तो इसे बदल दें 2 अक्टूबर को नर्मदा जिले के सागबारा इलाके के खोपी में 'वन अधिकार सत्याग्रह' को संबोधित करते हुए, शंकरसिंह वाघेला ने जोर देकर कहा था कि आदिवासी ही वन भूमि के असली मालिक हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि आंदोलन में समय बर्बाद करने के बजाय, आदिवासियों को बस सरकार बदल देनी चाहिए।'
वाघेला ने किया अलग 'भीलिस्तान' राज्य बनाने का समर्थन अपने संबोधन के दौरान वाघेला ने किसान नेताओं से यह भी अपील की कि वे आने वाले दिनों में सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए बैलगाड़ियों के साथ गांधीनगर तक मार्च करें। साथ ही कहा कि अगर यह सरकार बेकार है, तो इसे बदल दें। उन्होंने कहा, 'हम एक अलग भीलिस्तान राज्य के लिए अपना समर्थन घोषित करते हैं। अलग भीलिस्तान बनाने के लिए मैं आदिवासियों का पूरा समर्थन करूंगा। पूरी दुनिया जानती है कि आदिवासी समुदाय सबसे ज्यादा पीड़ित है। दिल्ली और गांधीनगर में बैठे लोग आरक्षण के दुश्मन हैं।'

