नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (NMC) ने डॉक्टरों और अस्पतालों के भ्रामक विज्ञापनों पर सख्ती करते हुए नए दिशानिर्देश लागू कर दिए हैं। अब चिकित्सा संस्थान बिना ठोस प्रमाण के खुद को 'नंबर-1', 'सबसे बेहतरीन' या '100% सफल इलाज' देने वाला नहीं बता सकेंगे। नियमों का उल्लंघन करने वाले डॉक्टरों को निलंबन और पंजीकरण रद्द होने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
AI से फर्जी मरीजों के रिव्यू बनाने पर रोक NMC ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए मरीजों के नकली अनुभव, तस्वीरें, आवाज या इलाज के परिणाम तैयार करके प्रचार करने पर प्रतिबंध लगाया है। इसके अतिरिक्त सोशल मीडिया पर नकली फॉलोअर्स, फर्जी रेटिंग और पैसे देकर सर्च रैंकिंग प्रभावित करने पर भी रोक लगाई गई है। डॉक्टर और अस्पताल मरीजों की सफलता की कहानियों या सेलिब्रिटी के समर्थन का इस्तेमाल भ्रामक प्रचार के लिए नहीं कर सकेंगे। हालांकि, स्वास्थ्य शिक्षा और जागरूकता के लिए डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल जारी रहेगा।
नियम तोड़ने पर तीन साल तक पंजीकरण रद्द होने की कार्रवाई आयोग ने उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार कार्रवाई का प्रावधान किया है। पहली बार नियम तोड़ने पर चेतावनी और नैतिकता संबंधी प्रशिक्षण दिया जा सकता है। दूसरी बार आर्थिक जुर्माना और तीसरी बार तीन से छह महीने का निलंबन संभव है। गंभीर मामलों में छह से बारह महीने तक निलंबन और बार-बार नियम तोड़ने पर एक से तीन वर्ष तक मेडिकल रजिस्टर से नाम हटाने की कार्रवाई हो सकती है।
मरीजों को क्या फायदा होगा? नए नियमों का उद्देश्य मरीजों को झूठे विज्ञापनों, अवास्तविक इलाज के दावों और फर्जी ऑनलाइन समीक्षाओं से बचाना है। अस्पताल अपने स्थान, सुविधाओं, डॉक्टरों की योग्यता और इलाज के शुल्क जैसी तथ्यात्मक जानकारी साझा कर सकेंगे, लेकिन मरीजों को आकर्षित करने के लिए गुमराह करने वाले दावों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे। NMC ने ये दिशानिर्देश 6 अक्टूबर 2026 को जारी किए थे और इन्हें तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।

