नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: भारत सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम तैयार करने जा रही है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को घोषणा की कि सरकार अगले एक महीने के भीतर AI नियमन से संबंधित कंसल्टेशन पेपर जारी करेगी।
इस दस्तावेज में डीपफेक, साइबर सुरक्षा, फर्जी डिजिटल सामग्री और AI से लोगों को होने वाले संभावित नुकसान जैसे मुद्दों पर विशेषज्ञों तथा संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे जाएंगे।
डीपफेक और AI के गलत इस्तेमाल पर सख्ती अश्विनी वैष्णव ने कहा कि AI से तैयार किए जा रहे डीपफेक वीडियो और तस्वीरें लगातार अधिक वास्तविक दिखाई देने लगी हैं। इनका इस्तेमाल गलत जानकारी फैलाने, धोखाधड़ी करने और लोगों को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है।
सरकार नए नियामकीय ढांचे में AI कंपनियों की जिम्मेदारी तय करने, उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को भी शामिल करना चाहती है।
केवल कानून नहीं, तकनीकी समाधान भी जरूरी
केंद्रीय मंत्री के मुताबिक AI से जुड़े जोखिमों को सिर्फ कानून बनाकर नियंत्रित नहीं किया जा सकता। इसके लिए तकनीकी सुरक्षा उपायों और कानूनी प्रावधानों को एक साथ लागू करना होगा।
सरकार चाहती है कि AI विकसित करने वाली कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म भी उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाएं।
नए ढांचे में सुरक्षित AI, मानव-केंद्रित विकास, कौशल प्रशिक्षण और सभी वर्गों तक तकनीक का लाभ पहुंचाने पर जोर रहेगा।
आम लोगों और AI कंपनियों पर क्या होगा असर?
भविष्य के नियम लागू होने पर AI से तैयार फर्जी वीडियो, पहचान के दुरुपयोग और डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में कंपनियों की जवाबदेही बढ़ सकती है।
इससे AI स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों को अपने उत्पादों में अतिरिक्त सुरक्षा सुविधाएं विकसित करने की जरूरत भी पड़ सकती है।
हालांकि, सरकार ने अभी नए नियम लागू नहीं किए हैं। अगले एक महीने में केवल परामर्श दस्तावेज जारी करने की योजना है। अंतिम नियम सभी संबंधित पक्षों से बातचीत और आगे की सरकारी प्रक्रिया के बाद तय होंगे।

