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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे कोर्स की फीस बीच में नहीं बढ़ा सकेंगे कॉलेज

नई दिल्ली: इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

झटपट समझें

नई दिल्ली: इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि निजी स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को पूरे कोर्स की फीस की जानकारी पहले ही मिलनी चाहिए।

मुख्य बातें

  • नई दिल्ली: इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।
  • अदालत ने कहा है कि निजी स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को पूरे कोर्स की फीस की जानकारी पहले ही मिलनी चाहिए।
  • पढ़ाई के बीच फीस बढ़ाने की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों में ही हो सकती है।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे कोर्स की फीस बीच में नहीं बढ़ा सकेंगे कॉलेज
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: इंजीनियरिंग और मेडिकल जैसे कोर्स की फीस बीच में नहीं बढ़ा सकेंगे कॉलेज

नई दिल्ली: इंजीनियरिंग, मेडिकल और अन्य प्रोफेशनल कोर्स करने वाले विद्यार्थियों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने कहा है कि निजी स्ववित्तपोषित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश लेने वाले छात्रों को पूरे कोर्स की फीस की जानकारी पहले ही मिलनी चाहिए। पढ़ाई के बीच फीस बढ़ाने की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों में ही हो सकती है।

चार-पांच साल के कोर्स की फीस पहले से तय हो

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने 14 अक्टूबर को दिए फैसले में कहा कि विद्यार्थियों और उनके परिवारों को प्रवेश लेते समय यह पता होना चाहिए कि पढ़ाई पर कुल कितना खर्च आएगा।

अदालत ने फीस निर्धारण समितियों को निर्देश दिया कि वे प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले पूरे कोर्स की फीस तय करने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। हालांकि, अप्रत्याशित खर्च बढ़ने जैसी विशेष परिस्थितियों में सीमित बदलाव की गुंजाइश रखी गई है।

37.5% फीस वृद्धि से जुड़ा था मामला

यह विवाद पश्चिम बंगाल के डॉ. बी.सी. रॉय इंजीनियरिंग कॉलेज से जुड़ा था। कॉलेज ने 2023 में दाखिला लेने वाले छात्रों की फीस दूसरे सेमेस्टर से लगभग 37.5% बढ़ा दी थी।

छात्रों ने इस फैसले को चुनौती दी थी। कलकत्ता हाईकोर्ट ने पहले से दाखिला ले चुके विद्यार्थियों पर बढ़ी हुई फीस लागू करने पर रोक लगाई थी और अतिरिक्त रकम लौटाने या समायोजित करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इन राहत संबंधी निर्देशों को बरकरार रखा।

छात्रों और अभिभावकों को क्या फायदा?

इस फैसले से प्रोफेशनल कॉलेजों की फीस व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है। विद्यार्थियों को प्रवेश से पहले अपने पूरे कोर्स का आर्थिक आकलन करने में मदद मिलेगी, जबकि संस्थानों को सामान्य परिस्थितियों में मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने की छूट नहीं होगी।

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