नई दिल्ली, 11 अक्टूबर 2026: देश के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए नई व्यवस्था तैयार की जा रही है। IIT प्रशासन परामर्शदाताओं, मनोवैज्ञानिकों और मनोचिकित्सकों का अलग कैडर बनाने पर विचार कर रहा है। इसका उद्देश्य परिसर में जरूरत पड़ने पर नियमित और पेशेवर सहायता उपलब्ध कराना है।
छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं के बीच अहम पहल हाल के महीनों में IIT परिसरों में छात्रों की आत्महत्या की घटनाओं ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ाई है। सितंबर में IIT बॉम्बे और अगस्त में IIT दिल्ली में छात्रों की मौत के बाद संस्थानों में सहायता व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे।
हालांकि, IIT निदेशकों के मुताबिक अलग कैडर बनाने का प्रस्ताव इन हालिया घटनाओं के बाद तैयार नहीं हुआ है। इस पर कम से कम दो वर्षों से चर्चा चल रही है।
काउंसलर और मनोवैज्ञानिकों के बनेंगे नियमित पद देश में फिलहाल 23 IIT संचालित हैं। प्रत्येक संस्थान में लगभग 3,000 से 18,000 विद्यार्थी पढ़ते हैं। मौजूदा समय में परिसरों में काउंसलिंग केंद्र उपलब्ध हैं, लेकिन कई संस्थानों में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत काउंसलर, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट और मनोचिकित्सकों के लिए स्वीकृत पद बनाए जा सकते हैं। इसके लिए अलग बजट और नियुक्ति संबंधी नियम तैयार करने की योजना है।
सुप्रीम कोर्ट की समिति ने भी जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित राष्ट्रीय कार्यबल की अंतरिम रिपोर्ट में शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण की कमी सामने आई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल IIT शिक्षकों में लगभग 90 प्रतिशत के पास ऐसे संवेदनशील मामलों में विद्यार्थियों की मदद करने का पर्याप्त प्रशिक्षण नहीं था।
IIT गांधीनगर प्रस्तावित कैडर का ढांचा तैयार करने पर काम कर रहा है। राष्ट्रीय कार्यबल की अंतिम रिपोर्ट 31 अक्टूबर तक आने की संभावना है।
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है। सभी IIT में नई नियुक्तियों की संख्या या शुरुआत की तारीख घोषित नहीं की गई है।

