नई दिल्ली: इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी कराने वाली कोचिंग संस्था FIITJEE की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने छात्रों से वसूली गई फीस के कथित दुरुपयोग और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में कंपनी तथा उसके निदेशकों दिनेश कुमार गोयल और मोनीला गोयल के खिलाफ गाजियाबाद की विशेष PMLA अदालत में अभियोजन शिकायत दाखिल की है।
जांच एजेंसी के अनुसार, ₹85.79 करोड़ की फीस के कथित दुरुपयोग की जांच की जा रही है। ED ने मामले से जुड़ी ₹71.88 करोड़ की जब्त या कुर्क संपत्तियों को सरकार के अधीन करने की मांग भी की है।
32 कोचिंग सेंटर बंद, 14,411 छात्रों की पढ़ाई प्रभावित
ED के मुताबिक, मई 2024 से फरवरी 2025 के बीच FIITJEE के 32 कोचिंग सेंटर अचानक बंद हो गए। इससे 14,411 छात्र प्रभावित हुए, जिन्होंने पहले ही फीस जमा कर दी थी।
जांच एजेंसी का आरोप है कि संस्थान ने दो से चार वर्ष के कोचिंग कार्यक्रमों के लिए छात्रों से प्रति विद्यार्थी लगभग ₹2.8 लाख से ₹3.5 लाख तक अग्रिम फीस ली थी।
शिक्षकों के वेतन भुगतान में देरी और अन्य वित्तीय समस्याओं के बीच कई केंद्र बंद हुए। ED का दावा है कि प्रबंधन को वित्तीय संकट की जानकारी होने के बावजूद नए दाखिले जारी रखे गए।
निदेशकों की सैलरी पर भी उठे सवाल
जांच एजेंसी ने आरोप लगाया है कि कंपनी के निदेशकों ने वित्त वर्ष 2022-23 से लगभग ₹24.92 करोड़ वेतन के रूप में प्राप्त किए, जबकि कई कर्मचारियों का भुगतान लंबित था।
ED के अनुसार, मामले की जांच उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पुलिस की चार FIR के आधार पर शुरू हुई थी। जांच के दौरान वित्तीय दस्तावेज, छात्रों की फीस के रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की गई।
हालांकि, चार्जशीट दाखिल होने का अर्थ आरोप सिद्ध होना नहीं है। कंपनी और आरोपित निदेशकों की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया के बाद होगा।
छात्रों की फीस वापस मिलेगी या नहीं?
प्रभावित छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल जमा फीस की वापसी का है। ED ने संपत्तियों की जब्ती और कुर्की की जानकारी दी है, लेकिन इससे सभी छात्रों को स्वतः या तुरंत धनवापसी मिलने की पुष्टि नहीं होती।
राहत और मुआवजे से संबंधित आगे की स्थिति अदालती आदेशों तथा संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी।

