नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के व्यापारिक संबंधों के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले लगभग 10 दिनों में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर नए प्रतिबंध लगाने का फैसला कर सकते हैं। अमेरिकी कानून के तहत ऐसे देशों से आयात होने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है। भारत भी इस कानून से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल हो सकता है।
रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका की नजर
नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में सर्जियो गोर ने बताया कि अमेरिका ने सितंबर में रूस और ईरान से संबंधित नए प्रतिबंध कानून को मंजूरी दी थी।
18 सितंबर को लागू हुए इस कानून के तहत रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों तथा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर अतिरिक्त व्यापारिक शुल्क लगाया जा सकता है।
कानून के अनुसार, निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले देशों के अमेरिकी बाजार में पहुंचने वाले सामान पर अधिकतम 100 प्रतिशत टैरिफ लगाया जा सकता है। हालांकि, अंतिम दर और संबंधित देशों का निर्धारण अमेरिकी प्रशासन करेगा।
भारत को छूट मिलेगी या नहीं?
अमेरिकी राजदूत ने कहा कि यह कानून किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं बनाया गया है। इसका उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है।
भारत को संभावित प्रतिबंधों से छूट मिलने के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका फैसला राष्ट्रपति ट्रंप करेंगे।
महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका ने अभी इस कानून के तहत भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा नहीं की है। फिलहाल यह संभावित कार्रवाई है, जिस पर अंतिम निर्णय आना बाकी है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी बातचीत जारी
संभावित प्रतिबंधों के बीच भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है।
सर्जियो गोर के अनुसार, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते के अधिकांश बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ तकनीकी और अन्य मुद्दों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
अमेरिका भारत के साथ रक्षा, सूचना प्रौद्योगिकी, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है।
यदि भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर अमेरिका को निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव शुल्क की दर, उसके दायरे और संभावित छूट पर निर्भर करेगा।

