नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग ने देश के 14 राज्यों और तीन केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची का विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) कराने का फैसला किया है। आयोग ने गुरुवार, 15 अक्टूबर को इसकी घोषणा की। इस प्रक्रिया के तहत नए मतदाताओं के नाम जोड़े जाएंगे, मौजूदा रिकॉर्ड की गलतियां सुधारी जाएंगी और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार अपात्र प्रविष्टियों की जांच की जाएगी।
किन राज्यों में होगा पुनरीक्षण?
इस अभियान में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा, मणिपुर, बिहार, असम, छत्तीसगढ़, गुजरात, केरल, मध्य प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में भी मतदाता सूची अपडेट की जाएगी।
उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मतदाता सूची का अद्यतन होना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कब जारी होगी नई मतदाता सूची?
आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, 12 नवंबर 2026 को प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित होगी। नागरिक 11 दिसंबर तक नाम जोड़ने, गलतियां सुधारने और अन्य दावे या आपत्तियां दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकेंगे।
दावों और आपत्तियों का निस्तारण 28 दिसंबर तक किया जाएगा। इसके बाद 4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम है।
पात्रता निर्धारित करने के लिए 1 जनवरी 2027 को आधार तिथि रखा गया है। आयोग ने अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर 2027 की आगामी पात्रता तिथियों के लिए अग्रिम आवेदन की व्यवस्था भी की है।
मतदाता अपना नाम कैसे जुड़वा सकते हैं?
जिन नागरिकों का नाम मतदाता सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। गलत जानकारी सुधारने या पता बदलने के लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जा सकता है। नाम हटाने संबंधी आपत्तियों के लिए फॉर्म-7 निर्धारित है।
नागरिक निर्वाचन आयोग के आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल पर अपना नाम जांच सकते हैं और संबंधित आवेदन जमा कर सकते हैं।
आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से वंचित न रहे। नाम हटाने के मामलों में निर्धारित सत्यापन और सुनवाई की प्रक्रिया का पालन करना भी आवश्यक होगा। Voter Service Portal
SIR और SSR में क्या अंतर है?
विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें मौजूदा मतदाता सूची को अपडेट किया जाता है। इसके विपरीत विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में मतदाता रिकॉर्ड का अधिक विस्तृत सत्यापन किया जाता है।
देश में SIR को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आयोग का यह निर्णय महत्वपूर्ण है। हालांकि, आयोग ने SSR की घोषणा को सीधे तौर पर उस विवाद का परिणाम नहीं बताया है।

