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डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी वापसी, सात महीने की सबसे तेज साप्ताहिक बढ़त की ओर भारतीय मुद्रा

मुंबई: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली है।

झटपट समझें

मुंबई: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया उपायों और डॉलर की मांग में कमी के चलते शुक्रवार को रुपया मजबूत हुआ।

मुख्य बातें

  • मुंबई: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली है।
  • भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया उपायों और डॉलर की मांग में कमी के चलते शुक्रवार को रुपया मजबूत हुआ।
  • सुबह के कारोबार में भारतीय मुद्रा 94.79 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गई।
डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी वापसी, सात महीने की सबसे तेज साप्ताहिक बढ़त की ओर भारतीय मुद्रा
डॉलर के मुकाबले रुपये में बड़ी वापसी, सात महीने की सबसे तेज साप्ताहिक बढ़त की ओर भारतीय मुद्रा

मुंबई: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में मजबूती देखने को मिली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया उपायों और डॉलर की मांग में कमी के चलते शुक्रवार को रुपया मजबूत हुआ। सुबह के कारोबार में भारतीय मुद्रा 94.79 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गई।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, सुबह 11 बजे के आसपास रुपया 94.88 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था। इस सप्ताह रुपये में लगभग 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई है और यह मार्च के बाद अपनी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर अग्रसर है।

RBI के कदमों से मिला रुपये को सहारा

पिछले सप्ताह रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 96.96 के रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया था। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, विदेशी निवेशकों की निकासी और डॉलर की बढ़ती मांग से भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ था।

स्थिति संभालने के लिए RBI ने विदेशी मुद्रा बाजार में कई कदम उठाए। इनमें सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर खरीद के लिए विशेष व्यवस्था और कुछ विदेशी मुद्रा सौदों से जुड़े नियम सख्त करना शामिल है।

इन उपायों के बाद डॉलर की मांग पर दबाव कम हुआ और रुपये को संभलने का अवसर मिला।

आम लोगों के लिए क्या मायने हैं?

रुपये में मजबूती से विदेश से सामान खरीदने वाली भारतीय कंपनियों को राहत मिल सकती है। कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आयातित वस्तुओं की लागत पर भी इसका सकारात्मक असर पड़ सकता है।

हालांकि, विनिमय दर में सुधार का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल, डीजल या अन्य सामान तुरंत सस्ता हो जाएगा। घरेलू कीमतें वैश्विक बाजार, करों और कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीतियों पर भी निर्भर करती हैं।

आगे क्या रहेगा महत्वपूर्ण?

विशेषज्ञों की नजर अब RBI की अगली नीतिगत कार्रवाई, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों के रुख पर है। बाजार में रुपये की मजबूती कायम रहेगी या नहीं, यह आने वाले कारोबारी सत्रों में स्पष्ट होगा।

फिलहाल रुपये में आई तेजी भारतीय विदेशी मुद्रा बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।

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