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तैयब मेहता की 'रिक्शा पुलर' 69.16 करोड़ में बिकी, कलाकार ने बनाया नया विश्व रिकॉर्ड

वर्ष 2002 की कलाकृति ने लंदन नीलामी में स्थापित किया कीर्तिमान, तोड़ा पिछला रिकॉर्ड

झटपट समझें

तैयब मेहता की 'रिक्शा पुलर' पेंटिंग ने 69.16 करोड़ रुपये में बिककर कलाकार के लिए एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है, जो उनकी किसी भी कलाकृति के लिए नीलामी में मिली अब तक की सबसे अधिक कीमत है।

मुख्य बातें

  • तैयब मेहता की 'रिक्शा पुलर' पेंटिंग 69.16 करोड़ रुपये में बिकी।
  • यह पेंटिंग वर्ष 2002 में बनाई गई थी।
  • यह तैयब मेहता की किसी पेंटिंग के लिए नीलामी में मिली अब तक की सबसे अधिक कीमत है।
  • इस पेंटिंग ने 'ट्रस्ड बुल' के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ा।
  • यह कलाकृति श्रमिक जीवन और मानवीय पीड़ा को दर्शाती है।
तयब मेहता की 'रिक्शा पुलर' पेंटिंग 69.16 करोड़ रुपये में बिकी।
तैयब मेहता की 'रिक्शा पुलर' पेंटिंग ने नीलामी में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

नई दिल्ली: भारत के प्रसिद्ध चित्रकार तैयब मेहता की चर्चित पेंटिंग 'रिक्शा पुलर' (Rickshaw Puller) ने नीलामी में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वर्ष 2002 में बनाई गई यह कलाकृति करीब 69.16 करोड़ रुपये में बिकी है। यह तैयब मेहता की किसी पेंटिंग के लिए नीलामी में मिली अब तक की सबसे अधिक कीमत है।

लंदन स्थित आर्ट ऑक्शन प्लेटफॉर्म वोल्टे उना (Volte Una) की पहली नीलामी में इस पेंटिंग के लिए 71.5 लाख अमेरिकी डॉलर की अंतिम कीमत मिली। नीलामी 11 अक्टूबर को संपन्न हुई, जबकि 12 और 13 अक्टूबर को इसकी रिकॉर्ड बिक्री की जानकारी प्रमुख समाचार संस्थानों में सामने आई।

पुराना रिकॉर्ड टूटा, 'ट्रस्ड बुल' को छोड़ा पीछे

इससे पहले तैयब मेहता की पेंटिंग 'ट्रस्ड बुल' (Trussed Bull) अप्रैल 2025 में लगभग 61.80 करोड़ रुपये में बिकी थी। अब 'रिक्शा पुलर' ने उस रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है।

नई पेंटिंग की बिक्री के साथ भारतीय आधुनिक कला बाजार में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। हालांकि, यह किसी भारतीय पेंटिंग की अब तक की सबसे महंगी नीलामी नहीं, बल्कि विशेष रूप से तैयब मेहता का नया व्यक्तिगत विश्व रिकॉर्ड है।

पेंटिंग में दिखाई देती है आम आदमी के संघर्ष की कहानी

'रिक्शा पुलर' एक्रेलिक रंगों से कैनवास पर बनाई गई पेंटिंग है। इसमें श्रमिक जीवन, मानवीय पीड़ा और संघर्ष को कलाकार की विशिष्ट शैली में प्रस्तुत किया गया है।

तैयब मेहता ने अपने लंबे कलात्मक जीवन में संघर्षरत मनुष्य, गिरती हुई आकृतियों और सामाजिक तनाव जैसे विषयों को बार-बार चित्रित किया। वर्ष 2009 में उनका निधन हो गया था, लेकिन उनकी कलाकृतियां आज भी अंतरराष्ट्रीय कला बाजार में विशेष स्थान रखती हैं।

एक ही पेंटिंग के लिए आयोजित हुई नीलामी

इस बिक्री की एक और खास बात यह रही कि वोल्टे उना ने अपनी पहली नीलामी में केवल एक कलाकृति प्रस्तुत की थी।

नीलामी से पहले पेंटिंग को मुंबई, नई दिल्ली और कई अंतरराष्ट्रीय कला केंद्रों में संभावित खरीदारों के सामने प्रदर्शित किया गया। अंतिम दौर में कई खरीदारों ने दिलचस्पी दिखाई, जिसके बाद बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची।

नीलामी मंच ने खरीदार की पहचान सार्वजनिक नहीं की है।

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