मुंबई: भारतीय रुपये में सोमवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब एक प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से विदेशी मुद्रा बाजार में दबाव कम करने के लिए उठाए गए कदमों के बाद रुपये ने मजबूत शुरुआत की।
सोमवार सुबह रुपया लगभग 95.73 से 95.76 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। शुक्रवार को यह करीब 96.73 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। यह पिछले कई महीनों में रुपये की सबसे बड़ी एकदिवसीय शुरुआती बढ़त में से एक है।
RBI ने क्या कदम उठाए?
रिजर्व बैंक ने सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर संबंधी जरूरतें पूरी करने के लिए विशेष व्यवस्था शुरू की है। इसके तहत तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों को निर्धारित बैंकों के माध्यम से डॉलर उपलब्ध कराए जाएंगे।
इससे खुले विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग कम होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव सौदों से जुड़े नियम भी सख्त किए हैं। कुछ सौदों के लिए निर्धारित सीमा 10 करोड़ डॉलर से घटाकर 50 लाख डॉलर कर दी गई है। पात्र विदेशी मुद्रा हेजिंग अनुबंधों पर बैंकों को 20 प्रतिशत नकद जोखिम आरक्षित राशि रखने का निर्देश भी दिया गया है।
रुपये पर दबाव क्यों था?
पिछले कुछ महीनों से कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेश की निकासी के कारण भारतीय मुद्रा दबाव में रही है।
रुपये के कमजोर होने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, क्योंकि कच्चे तेल और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं का भुगतान डॉलर में होता है।
हालांकि सोमवार की तेजी से बाजार को राहत मिली है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये में स्थायी मजबूती के लिए कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पूंजी प्रवाह में सुधार जरूरी होगा।

