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₹96.29 पर संभला रुपया: मजबूत डॉलर और महंगे कच्चे तेल के बीच RBI के हस्तक्षेप ने बड़ी गिरावट रोकी

मुंबई: वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय रुपया सोमवार को बड़ी गिरावट से बच गया।

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मुंबई: वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय रुपया सोमवार को बड़ी गिरावट से बच गया। कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 96.2925 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 96.3150 पर था।

मुख्य बातें

  • मुंबई: वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय रुपया सोमवार को बड़ी गिरावट से बच गया।
  • कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 96.2925 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 96.3150 पर था।
  • यानी दिनभर दबाव बने रहने के बावजूद मुद्रा लगभग सपाट बंद हुई।
₹96.29 पर संभला रुपया: मजबूत डॉलर और महंगे कच्चे तेल के बीच RBI के हस्तक्षेप ने बड़ी गिरावट रोकी
₹96.29 पर संभला रुपया: मजबूत डॉलर और महंगे कच्चे तेल के बीच RBI के हस्तक्षेप ने बड़ी गिरावट रोकी

मुंबई: वैश्विक बाजारों में डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय रुपया सोमवार को बड़ी गिरावट से बच गया। कारोबारी सत्र के अंत में रुपया 96.2925 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जबकि पिछले सत्र में यह 96.3150 पर था। यानी दिनभर दबाव बने रहने के बावजूद मुद्रा लगभग सपाट बंद हुई।

Reserve Bank of India की ओर से संभावित डॉलर बिक्री ने रुपये को सहारा दिया। कारोबारियों का मानना है कि केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप ने डॉलर की मांग और वैश्विक दबाव के बीच रुपये की चाल को सीमित दायरे में रखने में मदद की।

रुपये के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी डॉलर की मजबूती रही। यूरोप में वित्तीय चिंताओं के कारण यूरो कमजोर हुआ और डॉलर सूचकांक करीब 17 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। मजबूत डॉलर आमतौर पर रुपये समेत उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ाता है।

इसके साथ ही कच्चा तेल फिर 103 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर भारतीय कंपनियों को अधिक डॉलर खरीदने पड़ते हैं। इससे विदेशी मुद्रा की मांग बढ़ सकती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।

आयातकों की hedging भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। Reuters के मुताबिक जनवरी से सितंबर के बीच भारतीय आयातकों ने करीब 576.6 अरब डॉलर के forward contracts बुक किए, जबकि निर्यातकों की forward dollar sales करीब 305.6 अरब डॉलर रही। यह अंतर भविष्य की डॉलर मांग को लेकर कंपनियों की सतर्कता दिखाता है।

सोमवार को रुपये की चाल पर भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में आए ठहराव का भी असर रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों की बातचीत एक तरह के “plateau” पर पहुंच गई है और आगे अतिरिक्त रियायत देना दोनों पक्षों के लिए कठिन हो सकता है। हालांकि बातचीत अभी जारी है।

अब मुद्रा बाजार की नजर 7 अक्टूबर को आने वाली RBI की मौद्रिक नीति पर है। ब्याज दरों के साथ-साथ महंगाई, कच्चे तेल और रुपये को लेकर केंद्रीय बैंक का आकलन आगे की दिशा के लिए अहम होगा।

रुपये में सोमवार की स्थिरता राहत जरूर है, लेकिन इसे दबाव खत्म होने का संकेत नहीं माना जा सकता। डॉलर की मजबूती, तेल की कीमत और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां निकट अवधि में भारतीय मुद्रा के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं।

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