सच्ची खबरें • मज़बूत भारत
लाइव टीवी

टाटा संस की लिस्टिंग पर नया दांव: टाटा ट्रस्ट्स ने दो कंपनियों के विलय का प्रस्ताव दिया

शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने के दबाव से बचने के लिए टाटा संस की संरचना बदलने की कोशिश

झटपट समझें

टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की लिस्टिंग के दबाव को कम करने के लिए टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में विलय करने का प्रस्ताव दिया है।

मुख्य बातें

  • टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की संरचना बदलने के लिए दो कंपनियों के विलय का प्रस्ताव दिया है।
  • इसका उद्देश्य टाटा संस को एनबीएफसी/सीआईसी श्रेणी से बाहर निकालना है।
  • विलय से टाटा संस की ऑपरेटिंग आय ₹1.05 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है।
  • इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए टाटा संस के बोर्ड और आरबीआई की मंजूरी आवश्यक है।
  • इस खबर से टाटा समूह के कई शेयरों में गिरावट देखी गई है।
टाटा संस की लिस्टिंग पर नया मोड़, टाटा ट्रस्ट्स ने रखा पुनर्गठन प्रस्ताव।
टाटा संस की लिस्टिंग पर चल रही अटकलों के बीच कंपनी की संरचना बदलने का प्रस्ताव आया है।

मुंबई: Tata Group की होल्डिंग कंपनी Tata Sons को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की संभावनाओं पर मंगलवार को नया मोड़ आया। Tata Trusts ने समूह की दो operating businesses को Tata Sons में मिलाकर कंपनी की संरचना बदलने का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य Tata Sons को उस NBFC/Core Investment Company नियामकीय श्रेणी से बाहर निकालना है जिसके कारण उस पर सार्वजनिक लिस्टिंग का दबाव बना हुआ है।

प्रस्ताव में Tata Electronics Systems Solutions और Tata Consulting Engineers (TCE) को Tata Sons के साथ merge करने की योजना शामिल है। Indian Express के मुताबिक इससे Tata Sons की operating income बढ़ेगी और उसकी आय तथा assets में investment activities का अनुपात कम हो सकता है। इसी बदलाव के आधार पर कंपनी RBI के NBFC/CIC classification से बाहर निकलने की कोशिश कर सकती है। The Indian Express

Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66% हिस्सेदारी है। प्रस्ताव का तर्क है कि दोनों operating businesses के विलय के बाद Tata Sons की operating revenue लगभग ₹1.05 लाख करोड़ तक पहुंच सकती है, जिससे कंपनी की प्रकृति केवल investment holding company जैसी नहीं रहेगी।

लेकिन यह अभी अंतिम फैसला नहीं है। restructuring के लिए Tata Sons के बोर्ड की मंजूरी के साथ Reserve Bank of India की स्वीकृति भी जरूरी होगी। Tata Sons को अपना मौजूदा NBFC registration surrender करने के लिए भी नियामकीय मंजूरी चाहिए होगी।

मामला इसलिए अहम है क्योंकि RBI ने Tata Sons की upper-layer NBFC के रूप में deregistration की पिछली मांग स्वीकार नहीं की थी। इसके बाद कंपनी के सार्वजनिक रूप से सूचीबद्ध होने की संभावना मजबूत हुई थी। पिछले सप्ताह Tata Sons के बोर्ड ने भी listing की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया था।

नए restructuring proposal ने निवेशकों की उन उम्मीदों को कमजोर किया है कि Tata Sons की संभावित listing से listed Tata companies में छिपी हुई holding value खुल सकती है। मंगलवार के कारोबार में इसका असर कई Tata Group stocks पर दिखाई दिया। Reuters के अनुसार Tata Chemicals लगभग 3.1%, Tata Investment Corporation 2.1% और Tata Motors Passenger Vehicles करीब 2% नीचे कारोबार कर रहे थे। TCS और Trent में भी लगभग 1% की कमजोरी दर्ज की गई।

खास तौर पर Tata Investment Corporation और Tata Chemicals जैसे शेयर Tata Sons की listing की अटकलों के प्रति संवेदनशील रहे हैं, क्योंकि निवेशक इन्हें समूह की holding-company value से जोड़कर देखते हैं।

इस प्रस्ताव के साथ Tata Trusts और Tata Sons के बीच governance को लेकर चल रहा मतभेद भी फिर चर्चा में आ गया है। हाल में Tata Sons के चेयरमैन N. Chandrasekaran के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के बोर्ड के फैसले को लेकर Trusts के भीतर मतभेद सामने आए थे।

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Tata Sons की listing रद्द नहीं हुई है। Tata Trusts ने केवल एक वैकल्पिक restructuring route प्रस्तावित किया है। इसे लागू करने के लिए corporate approvals और RBI की मंजूरी जरूरी होगी।

यह खबर शेयर करें

WhatsAppXFacebook