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भारत की नई स्टील नीति: 2047 तक 600 मिलियन टन क्षमता का लक्ष्य, आयात और प्रदूषण पर भी ध्यान

केंद्र सरकार देश के स्टील उद्योग के लिए अगले दो दशकों का रोडमैप तैयार कर रही है।

झटपट समझें

भारत सरकार 2047 तक देश की स्टील उत्पादन क्षमता को 600 मिलियन टन तक बढ़ाने के लिए एक नई राष्ट्रीय स्टील नीति का मसौदा तैयार कर रही है, जिसमें सस्ते आयात को रोकने और कार्बन उत्सर्जन को कम करने पर भी जोर दिया जाएगा।

मुख्य बातें

  • नई राष्ट्रीय स्टील नीति का लक्ष्य 2047 तक भारत की स्टील उत्पादन क्षमता को 600 मिलियन टन तक पहुंचाना है।
  • मौजूदा वित्त वर्ष में देश की स्टील क्षमता लगभग 220 मिलियन टन है।
  • नीति का मसौदा सार्वजनिक परामर्श के लिए एक सप्ताह के भीतर जारी किया जाएगा।
  • सरकार सस्ते और घटिया गुणवत्ता वाले स्टील आयात को हतोत्साहित करने के लिए व्यापार-उपायों पर जोर देगी।
  • 2047 तक लौह अयस्क की आवश्यकता लगभग 772 मिलियन टन और कोकिंग कोल की जरूरत करीब 214 मिलियन टन तक पहुंच सकती है।
  • नीति का लक्ष्य 2047 तक स्टील क्षेत्र की औसत कार्बन-उत्सर्जन तीव्रता को 2.54 टन CO₂ से घटाकर 1.54 टन प्रति टन करना है।
नई स्टील पॉलिसी की तैयारी 2047 तक 600 MT क्षमता का लक्ष्य
यह खंड भारत की नई राष्ट्रीय स्टील नीति के प्रमुख लक्ष्यों और उद्देश्यों पर प्रकाश डालता है।

नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश के स्टील उद्योग के लिए अगले दो दशकों का रोडमैप तैयार कर रही है। स्टील सचिव संदीप पौंड्रिक ने मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को बताया कि प्रस्तावित नई National Steel Policy में भारत की steelmaking capacity को 2047 तक 600 मिलियन टन (60 करोड़ टन) सालाना पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मौजूदा वित्त वर्ष में देश की क्षमता करीब 220 मिलियन टन है।

नई नीति का मसौदा करीब एक सप्ताह के भीतर सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी करने की तैयारी है। उद्योग, कंपनियां और अन्य stakeholders उस पर अपनी टिप्पणियां दे सकेंगे। यह नीति 2017 की National Steel Policy को नए औद्योगिक, व्यापारिक और पर्यावरणीय लक्ष्यों के अनुरूप अपडेट करेगी। पुरानी नीति में 2030-31 तक 300 मिलियन टन crude-steel capacity का लक्ष्य था।

नई नीति में केवल उत्पादन क्षमता बढ़ाना ही लक्ष्य नहीं है। सरकार सस्ते और घटिया गुणवत्ता वाले आयात को हतोत्साहित करने के लिए safeguard duty और anti-dumping duty जैसे trade-remedy उपायों पर भी जोर देना चाहती है। साथ ही छोटे घरेलू steel producers को तकनीक और लागत के मामले में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने की योजना है।

इसकी पृष्ठभूमि में आयात में हालिया बढ़ोतरी भी महत्वपूर्ण है। Reuters के अनुसार अप्रैल से अगस्त 2026 के दौरान भारत ने करीब 3.5 मिलियन टन finished steel आयात किया, जो एक साल पहले की समान अवधि से 29.5% ज्यादा है। इस अवधि में चीन भारत को finished steel बेचने वाला सबसे बड़ा देश रहा और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी लगभग 31.8% थी।

सरकार को 600 मिलियन टन की क्षमता तक पहुंचने के लिए कच्चे माल की भारी जरूरत का भी अनुमान है। नीति के मसौदे के मुताबिक 2047 तक iron ore की आवश्यकता लगभग 772 मिलियन टन और coking coal की जरूरत करीब 214 मिलियन टन तक पहुंच सकती है। उच्च गुणवत्ता वाले संसाधनों तक पहुंच के लिए विदेशों में mining assets खरीदने और joint ventures जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। Reuters

पर्यावरण नीति का दूसरा बड़ा हिस्सा है। मसौदे में steel sector की औसत carbon-emission intensity को मौजूदा करीब 2.54 टन CO₂ प्रति टन crude steel से घटाकर 2047 तक लगभग 1.54 टन करने का लक्ष्य है। यह भारत के 2070 net-zero लक्ष्य से जुड़ा है।

इस्पात मंत्रालय पहले ही Green Steel Taxonomy लागू कर चुका है। मंत्रालय के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में 90 steel units को green-steel certification मिला और इन इकाइयों ने कुल 12.4 मिलियन टन प्रमाणित green steel का उत्पादन किया। सरकार steelmaking में green hydrogen के इस्तेमाल के लिए छह pilot projects को भी समर्थन दे रही है।

नई नीति अभी draft stage में है। यानी 600 मिलियन टन सहित प्रस्तावित लक्ष्यों और उपायों को अंतिम सरकारी नीति मानना अभी जल्दबाजी होगी; सार्वजनिक consultation और आगे की प्रक्रिया के बाद अंतिम framework सामने आएगा।

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