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कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

पश्चिम एशिया में तनाव के बीच सेंसेक्स 1,200 अंक से अधिक टूटा, निवेशकों के ₹10 लाख करोड़ डूबे।

व्यापारी तेल के कुओं और शहर के दृश्यों के साथ कंप्यूटर स्क्रीन पर स्टॉक चार्ट देख रहे हैं।
भारतीय शेयर बाजार में 23 अक्टूबर 2026 को कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि के कारण भारी गिरावट दर्ज की गई।
मुख्य बातें

23 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसका मुख्य कारण पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 114 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचना था। इस गिरावट से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹10 लाख करोड़ घट गया।

  • 23 अक्टूबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखी गई।
  • कच्चे तेल की कीमतें लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गईं।
  • बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूंजीकरण लगभग ₹10 लाख करोड़ घट गया।
  • सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 1,200 अंक से अधिक फिसल गया।
  • निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक लगभग 4 प्रतिशत और मिडकैप 100 लगभग 3 प्रतिशत टूट गया।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों ने 22 अक्टूबर को लगभग ₹3,459 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे।

मुंबई, 23 अक्टूबर 2026। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बीच भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती बढ़त के बाद सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में पहुंच गए। दोपहर तक बाजार में आई गिरावट से बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग ₹10 लाख करोड़ घट गया।

दिन की ऊंचाई से 1,200 अंक फिसला सेंसेक्स शुक्रवार सुबह शेयर बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही। सेंसेक्स करीब 350 अंक की बढ़त के साथ 73,596 और निफ्टी 22,737 के आसपास खुला। हालांकि, कारोबार बढ़ने के साथ बिकवाली तेज हो गई। दोपहर 1:19 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार, सेंसेक्स अपने दिन के उच्चतम स्तर से 1,200 अंक से अधिक फिसलकर 72,600 के नीचे कारोबार कर रहा था। वहीं, निफ्टी 22,400 के नीचे पहुंच गया। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट अधिक गंभीर रही। निफ्टी स्मॉलकैप 100 सूचकांक लगभग 4 प्रतिशत और मिडकैप 100 करीब 3 प्रतिशत टूट गया।

कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है। सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की बढ़ती कीमतें देश के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की उत्पादन लागत पर दबाव डाल सकती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बनी रहने पर भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर और उपभोक्ता मांग प्रभावित हो सकती है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली भी बनी वजह शेयर बाजार पर विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली का भी दबाव है।

गुरुवार, 22 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने लगभग ₹3,459 करोड़ के भारतीय शेयर बेचे थे। अक्टूबर के शुरुआती 14 कारोबारी सत्रों में से 11 में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे।

शुक्रवार को मेटल, रियल्टी, ऑटोमोबाइल और बैंकिंग शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। इसके विपरीत, आईटी क्षेत्र के कुछ शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

स्विगी के शेयर में भी लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। कंपनी के कारोबार की लाभप्रदता को लेकर ब्रोकरेज कंपनियों की चिंताओं ने शेयर पर दबाव बढ़ाया।

निवेशकों के लिए आगे क्या? बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले कारोबारी सत्रों में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति महत्वपूर्ण कारक होंगे।

अमेरिकी केंद्रीय बैंक की अगली नीतिगत बैठक 27 और 28 अक्टूबर को निर्धारित है। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, आगे की दिशा वैश्विक परिस्थितियों और कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।

नोट: खबर में दिए गए बाजार के आंकड़े 23 अक्टूबर के दोपहर के कारोबारी सत्र के हैं। अंतिम बंद भाव अलग हो सकते हैं।

प्रकाशित: शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 | 3:06 PM IST

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