मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। दोपहर करीब 2 बजे तक BSE सेंसेक्स 1,200 अंक से अधिक यानी करीब 1.6% गिरकर 73,600 के आसपास पहुंच गया, जबकि NSE निफ्टी 50 करीब 386 अंक टूटकर 23,060 के स्तर पर आ गया। दोनों प्रमुख सूचकांक करीब तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गए।
सुबह बाजार खुलने के साथ ही दबाव दिखाई देने लगा था। 9:30 बजे सेंसेक्स करीब 577 अंक नीचे था, लेकिन दिन बढ़ने के साथ बिकवाली तेज होती गई और गिरावट दोगुनी से अधिक हो गई।
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा वैश्विक कारण अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की यील्ड में तेज उछाल है। अमेरिका की 10-वर्षीय Treasury yield 5% से ऊपर पहुंच गई और 2007 के बाद के उच्च स्तर के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। बेहतर अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद निवेशकों में यह आशंका बढ़ी है कि Federal Reserve महंगाई नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रख सकता है या आगे फिर बढ़ा सकता है।
भारत के लिए दूसरी बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमत है। Brent crude गुरुवार को 106 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने से आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
इसके अलावा मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक बाजारों में risk-off sentiment ने emerging markets पर दबाव बढ़ाया है। बुधवार को अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी रही और गुरुवार को एशियाई बाजारों में इसका असर दिखाई दिया।
भारतीय बाजार में बिकवाली व्यापक रही। बैंकिंग, वित्तीय और metal shares पर विशेष दबाव देखा गया, जबकि volatility index में भी तेज उछाल आया।
इस गिरावट को अभी दिन का अंतिम closing आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए, क्योंकि खबर लिखे जाने तक कारोबार जारी था। बाजार बंद होने तक सेंसेक्स और निफ्टी के स्तर में बदलाव हो सकता है।

