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बिजली स्टोरेज के लिए केंद्र की ₹14,500 करोड़ की योजना को मंजूरी

कैबिनेट ने ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने का फैसला किया।

दो इंजीनियर सौर ऊर्जा संयंत्र में बैटरी भंडारण प्रणाली का निरीक्षण कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने देश में बिजली भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹14,500 करोड़ की नई योजना को मंजूरी दी है।
मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने देश में बिजली भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹14,500 करोड़ की नई योजना को मंजूरी दी है, जिसका उद्देश्य ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना 2026 से 2031 तक लागू होगी और लगभग 92 गीगावॉट-घंटा की नई भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है।

  • केंद्र सरकार ने ₹14,500 करोड़ की नई बिजली भंडारण योजना को मंजूरी दी है।
  • यह योजना ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करेगी।
  • योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाएगी।
  • इसका लक्ष्य लगभग 92 गीगावॉट-घंटा की नई ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है।
  • यह सौर और पवन ऊर्जा को रात में उपयोग करने में मदद करेगी।
  • उपभोक्ताओं को ग्रिड स्थिरता और स्वच्छ ऊर्जा की बेहतर उपलब्धता का लाभ मिलेगा।

नई दिल्ली, 4 नवंबर 2026। केंद्र सरकार ने देश में बिजली भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ₹14,500 करोड़ की नई योजना को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में ग्रिड-स्केल एनर्जी स्टोरेज परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने का निर्णय लिया गया।

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। सरकार की इस पहल का उद्देश्य बड़े स्तर पर बिजली संग्रह करने वाली परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करना और देश की बिजली आपूर्ति प्रणाली को अधिक मजबूत बनाना है।

2026 से 2031 तक लागू होगी योजना

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक लागू की जाएगी।

इसके तहत वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के माध्यम से उन ऊर्जा भंडारण परियोजनाओं को वित्तीय सहायता दी जाएगी, जिन्हें विकसित करने में शुरुआती निवेश काफी अधिक होता है।

रिपोर्ट में लगभग 92 गीगावॉट-घंटा की नई ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में क्षमता की इकाई को लेकर अंतर है। इसलिए विस्तृत सरकारी दस्तावेज के आधार पर इस आंकड़े की अंतिम पुष्टि जरूरी है।

सौर ऊर्जा को रात में इस्तेमाल करने में मिलेगी मदद

भारत में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन सौर ऊर्जा का उत्पादन मुख्यतः दिन में और पवन ऊर्जा का उत्पादन हवा की उपलब्धता पर निर्भर करता है।

ऐसे में ऊर्जा भंडारण प्रणालियां महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। दिन में पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को बैटरी या अन्य तकनीकों के जरिए संग्रह किया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर बिजली ग्रिड को वापस उपलब्ध कराया जा सकता है।

इससे शाम और रात के समय बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने, अक्षय ऊर्जा की बर्बादी घटाने और बिजली आपूर्ति को अधिक स्थिर बनाने में मदद मिल सकती है।

पहले भी मंजूर हुई थी बड़ी हरित ऊर्जा योजना

केंद्र सरकार ने 30 सितंबर 2026 को ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-3 को मंजूरी दी थी। उस योजना का कुल प्रस्तावित परिव्यय ₹1,86,405 करोड़ है। इसमें बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क के विस्तार के साथ 50 गीगावॉट-घंटा बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करने का प्रावधान भी है।

नवंबर में घोषित ₹14,500 करोड़ की योजना एक नया वित्तीय सहायता निर्णय है। इसे सितंबर में मंजूर हुई पूरी परियोजना राशि के बराबर या उसका सीधा अतिरिक्त खर्च नहीं समझना चाहिए, जब तक विस्तृत सरकारी दस्तावेज में दोनों योजनाओं का संबंध स्पष्ट न हो।

आम बिजली उपभोक्ताओं को क्या होगा फायदा?

नई योजना का संभावित लाभ बिजली ग्रिड की स्थिरता और भविष्य में स्वच्छ ऊर्जा की बेहतर उपलब्धता के रूप में सामने आ सकता है।

ऊर्जा भंडारण सुविधाएं बढ़ने से बिजली कंपनियों को अधिक मांग वाले समय में संग्रह की गई बिजली इस्तेमाल करने का विकल्प मिलेगा। हालांकि, इससे घरेलू बिजली बिल तुरंत कम होने या किसी निश्चित दर से सस्ती बिजली मिलने की घोषणा नहीं हुई है।

परियोजनाओं के समय पर निर्माण, उनकी लागत और राज्यों की बिजली वितरण नीतियों के आधार पर वास्तविक लाभ तय होगा।

प्रकाशित: बुधवार, 4 नवंबर 2026 | 5:29 PM IST

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