मुंबई, 2 नवंबर 2026। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ाने और घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को राहत देने के उद्देश्य से पूंजीगत लाभ कर (Capital Gains Tax) में बड़े बदलाव की सिफारिश किए जाने की खबर सामने आई है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की सोमवार को प्रकाशित विशेष रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सरकार से विदेशी निवेशकों के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स समाप्त करने की सिफारिश की है।
मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि सेबी ने घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी कर राहत का सुझाव दिया है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर सरकार ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और सेबी की ओर से इनकी सार्वजनिक आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है।
विदेशी निवेशकों के लिए क्या बदल सकता है? वर्तमान व्यवस्था के तहत निर्धारित शर्तें पूरी करने वाले शेयर निवेश पर एक वर्ष से अधिक समय के बाद होने वाले दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर सामान्यतः 12.5 प्रतिशत कर लगता है। वहीं पात्र अल्पकालिक इक्विटी लाभ पर 20 प्रतिशत की दर लागू होती है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सेबी की सिफारिश विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को दीर्घकालिक लाभ पर लगने वाले कर से राहत देने से संबंधित है। इसका उद्देश्य भारतीय बाजार में विदेशी निवेश को आकर्षित करना और निवेश की लागत कम करना बताया गया है।
भारत में इस वर्ष विदेशी निवेशकों ने शेयर बाजार से लगभग 31 अरब डॉलर निकाले हैं। लगातार बिकवाली और दूसरे उभरते बाजारों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन के बीच कर संबंधी राहत को निवेश आकर्षित करने के संभावित उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी राहत का प्रस्ताव घरेलू निवेशकों के लिए सुझाया गया बदलाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, यदि कोई निवेशक म्यूचुअल फंड की यूनिट एक वर्ष से अधिक समय तक रखने के बाद अपनी राशि एक स्कीम से दूसरी स्कीम में स्थानांतरित करता है, तो इस बदलाव को कर योग्य बिक्री न मानने की सिफारिश की गई है।
अभी सामान्यतः एक म्यूचुअल फंड स्कीम से दूसरी स्कीम में स्विच करने पर पहली स्कीम की यूनिट का रिडेम्प्शन माना जाता है और लागू नियमों के अनुसार पूंजीगत लाभ कर देना पड़ सकता है।
यदि सरकार प्रस्ताव स्वीकार करती है, तो पात्र निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति बदलने के लिए अधिक लचीलापन मिल सकता है। लेकिन छूट की वास्तविक शर्तें और दायरा किसी अंतिम सरकारी घोषणा के बाद ही स्पष्ट होंगे।
बजट 2027 से पहले सामने आई सिफारिश ये सुझाव फरवरी 2027 में प्रस्तावित केंद्रीय बजट की तैयारियों से पहले सामने आए हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, सेबी की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं हैं और वित्त मंत्रालय को अंतिम निर्णय लेना होगा।
रॉयटर्स ने इस विषय पर सेबी और वित्त मंत्रालय से प्रतिक्रिया मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट प्रकाशित होने तक जवाब नहीं मिला था।
इससे पहले 20 जुलाई 2026 को वित्त मंत्रालय ने संसद में स्पष्ट किया था कि घरेलू और खुदरा इक्विटी निवेशकों के लिए LTCG टैक्स समाप्त करने का कोई प्रस्ताव उस समय विचाराधीन नहीं था। इसलिए ताजा रिपोर्ट को सभी भारतीय निवेशकों के लिए कर समाप्त होने की घोषणा नहीं समझना चाहिए।
प्रकाशित: सोमवार, 2 नवंबर 2026 | 3:57 PM IST

