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सेबी का म्यूचुअल फंड्स के लिए बड़ा कदम: 1 अप्रैल 2027 से शेयरों का नेट सेटलमेंट

बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए शेयर खरीद-बिक्री के निपटान नियमों में बदलाव किया है।

SEBI भवन के सामने एक पक्षी उड़ रहा है, जिसके ऊपर पेड़ की पत्तियां दिख रही हैं।
सेबी ने म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लेनदेन के निपटान से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव किया है।
मुख्य बातें

सेबी ने म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए शेयर बाजार में लेनदेन के निपटान से जुड़े नियमों में बदलाव किया है, जिसके तहत 1 अप्रैल 2027 से पात्र शेयरों की खरीद और बिक्री के लिए धनराशि का निपटान नेट आधार पर किया जा सकेगा। यह कदम फंड हाउसों की नकदी जरूरतों को कम करने और बाजार दक्षता बढ़ाने के लिए उठाया गया है।

  • सेबी ने म्यूचुअल फंड योजनाओं के लिए शेयर लेनदेन के निपटान का नया नियम जारी किया है।
  • यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी।
  • म्यूचुअल फंड अब पात्र शेयर खरीद और बिक्री के लिए धनराशि का निपटान नेट आधार पर कर सकेंगे।
  • यह सुविधा केवल पात्र आउटराइट लेनदेन के लिए होगी, जिसमें एक सेटलमेंट चक्र में केवल खरीद या केवल बिक्री हुई हो।
  • शेयरों की डिलीवरी का निपटान सकल आधार पर ही जारी रहेगा, केवल भुगतान वाले हिस्से में बदलाव होगा।
  • यह बदलाव विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को पहले से मिली सुविधा के समान है।

मुंबई, 5 नवंबर 2026। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लेनदेन के निपटान से जुड़ा महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड योजनाएं नकद बाजार में पात्र शेयर खरीद और बिक्री के लिए धनराशि का निपटान नेट आधार पर कर सकेंगी। यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2027 से लागू होगी।

सेबी ने गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक परिपत्र जारी किया। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने शाम 4:44 बजे IST प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में इस फैसले की पुष्टि की है।

क्या है नेट सेटलमेंट की नई व्यवस्था?

अभी संस्थागत निवेशकों के शेयर लेनदेन में खरीद और बिक्री से संबंधित भुगतान दायित्वों का निपटान सकल आधार पर किया जाता है। इसके कारण किसी म्यूचुअल फंड योजना को शेयर बेचने से राशि मिलने वाली होने के बावजूद दूसरी खरीद के लिए अलग से धन की व्यवस्था करनी पड़ सकती है।

नई व्यवस्था में पात्र खरीद और बिक्री की रकम का आपस में समायोजन किया जा सकेगा। इससे वास्तविक भुगतान के लिए आवश्यक धनराशि कम हो सकती है।

उदाहरण के लिए, यदि कोई म्यूचुअल फंड योजना एक ही सेटलमेंट चक्र में पात्र शेयरों की 10 करोड़ रुपये की खरीद और दूसरे शेयरों की 8 करोड़ रुपये की बिक्री करती है, तो निर्धारित शर्तों के अधीन उसकी शुद्ध भुगतान आवश्यकता 2 करोड़ रुपये हो सकती है।

यह उदाहरण केवल व्यवस्था को समझाने के लिए है। वास्तविक निपटान सभी लागू नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार होगा।

हर तरह के लेनदेन पर लागू नहीं होगी छूट

सेबी ने स्पष्ट किया है कि नेट सेटलमेंट की सुविधा केवल पात्र आउटराइट लेनदेन के लिए होगी। इसका अर्थ है कि किसी एक प्रतिभूति में एक सेटलमेंट चक्र के दौरान केवल खरीद या केवल बिक्री हुई हो।

यदि उसी चक्र में किसी शेयर की खरीद और बिक्री दोनों की गई हैं, तो उस प्रतिभूति के लेनदेन को नेटिंग के दायरे में शामिल नहीं किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, एक ही म्यूचुअल फंड कंपनी की दो अलग-अलग योजनाओं के लेनदेन का आपस में समायोजन नहीं किया जा सकेगा। हर योजना का निपटान अलग आधार पर होगा।

शेयरों की डिलीवरी की व्यवस्था नहीं बदलेगी

प्रस्तावित ढांचे के अनुसार, बदलाव मुख्य रूप से लेनदेन के भुगतान वाले हिस्से से संबंधित है। शेयरों की डिलीवरी का निपटान सकल आधार पर ही जारी रहेगा।

इसका उद्देश्य म्यूचुअल फंड योजनाओं की अस्थायी नकदी जरूरत कम करना है, जबकि शेयरों की वास्तविक डिलीवरी और निवेशकों की सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं कायम रहेंगी।

सेबी ने सितंबर 2026 में इस बदलाव पर सार्वजनिक सुझाव मांगे थे। उस समय नियामक ने स्पष्ट किया था कि योजना-वार लेखांकन, मूल्यांकन और निवेशक सुरक्षा से संबंधित मौजूदा प्रावधानों को बनाए रखना प्रस्ताव का प्रमुख हिस्सा है।

विदेशी निवेशकों को पहले मिल चुकी है सुविधा

सेबी ने 24 अप्रैल 2026 को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए नकद बाजार में पात्र लेनदेन के नेट सेटलमेंट का ढांचा जारी किया था।

अब घरेलू म्यूचुअल फंड योजनाओं को भी इसी तरह की सुविधा देने का निर्णय लिया गया है।

नियामक का उद्देश्य प्रतिभूति बाजार में भुगतान निपटान की दक्षता बढ़ाना और अनावश्यक धन प्रबंधन लागत कम करना है।

आम म्यूचुअल फंड निवेशकों पर क्या असर होगा?

इस फैसले का सीधा संबंध म्यूचुअल फंड कंपनियों के शेयर लेनदेन से है, न कि निवेशकों द्वारा सामान्य SIP किस्त जमा करने की प्रक्रिया से।

नई व्यवस्था से फंड प्रबंधकों को पोर्टफोलियो में शेयर खरीदने और बेचने के दौरान धन के प्रबंधन में अधिक सुविधा मिल सकती है। खासकर उन परिस्थितियों में यह उपयोगी हो सकती है, जब किसी इंडेक्स फंड को अपने पोर्टफोलियो में बड़े बदलाव करने हों।

हालांकि, इससे निवेशकों का रिटर्न अपने आप बढ़ने या म्यूचुअल फंड की फीस घटने की कोई गारंटी नहीं है। वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि फंड हाउस नई व्यवस्था का उपयोग कैसे करते हैं।

कब से लागू होगा फैसला?

सेबी ने नई व्यवस्था को लागू करने की तारीख 1 अप्रैल 2027 निर्धारित की है। इसलिए म्यूचुअल फंड कंपनियों और संबंधित बाजार संस्थानों को आवश्यक परिचालन व्यवस्थाएं तैयार करने के लिए समय मिलेगा।

इस बदलाव को भारतीय पूंजी बाजार की निपटान प्रणाली को अधिक कुशल बनाने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

प्रकाशित: गुरुवार, 5 नवंबर 2026 | 8:24 PM IST

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