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चावल की बढ़ती कीमतों पर सरकार का बड़ा कदम: अब हर शुक्रवार बताना होगा स्टॉक, 5 राज्यों को भंडारण सीमा की मंजूरी

केंद्र सरकार ने चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और जमाखोरी रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

धान के खेत में धान और चावल के बोरे, गोदाम में काम करते लोग।
केंद्र सरकार ने खुले बाजार में चावल की बिक्री का लक्ष्य दोगुना कर दिया है, ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़ाई जा सके।
मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने चावल की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कई उपाय किए हैं, जिनमें व्यापारियों के लिए साप्ताहिक स्टॉक रिपोर्टिंग अनिवार्य करना और पांच दक्षिणी राज्यों को भंडारण सीमा लगाने की अनुमति देना शामिल है। सरकार ने खुले बाजार में चावल की बिक्री का लक्ष्य भी दोगुना कर दिया है।

  • चावल और धान के सभी कारोबारियों को हर शुक्रवार अपने स्टॉक की जानकारी सरकारी पोर्टल पर देनी होगी।
  • केंद्र ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को चावल तथा धान की भंडारण सीमा तय करने की मंजूरी दी है।
  • खुले बाजार में चावल की बिक्री का लक्ष्य 25 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन कर दिया गया है।
  • NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार को 'भारत चावल' की अतिरिक्त मात्रा उपलब्ध कराई जाएगी।
  • सितंबर 2026 में चावल की खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 8.25 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
  • निर्धारित भंडारण सीमा का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026। देश में चावल की बढ़ती कीमतों और जमाखोरी की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अब देशभर के चावल और धान कारोबारियों, थोक विक्रेताओं, खुदरा दुकानदारों, बड़ी रिटेल चेन और मिल संचालकों को अपने पास मौजूद भंडार की जानकारी हर शुक्रवार सरकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।

इसके साथ ही केंद्र ने पांच दक्षिणी राज्यों को आवश्यकतानुसार चावल और धान की अधिकतम भंडारण सीमा निर्धारित करने की मंजूरी दी है। सरकार ने खुले बाजार में चावल की बिक्री का लक्ष्य भी दोगुना कर दिया है, ताकि बाजार में आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर दबाव कम किया जा सके।

चावल की बढ़ती कीमतों पर केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: अब हर शुक्रवार देना होगा स्टॉक का हिसाब, पांच राज्यों को भंडारण सीमा लगाने की मंजूरी
चावल और धान के कारोबारियों को अब हर शुक्रवार अपने स्टॉक की जानकारी सरकारी पोर्टल पर दर्ज करनी होगी।

अब छह श्रेणियों में बताना होगा चावल का स्टॉक

केंद्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के आदेश के अनुसार, व्यापारियों को बासमती चावल, प्रीमियम गैर-बासमती चावल, सामान्य गैर-बासमती चावल, उसना चावल, टूटे हुए चावल और धान का स्टॉक अलग-अलग दर्ज करना होगा।

यह व्यवस्था सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लागू होगी।

कारोबारियों को प्रत्येक शुक्रवार खाद्य भंडार पोर्टल पर अपने स्टॉक की सही जानकारी अपडेट करनी होगी।

मंत्रालय के अनुसार, पंजीकरण नहीं कराने या निर्धारित भंडारण सीमा का उल्लंघन करने वाली संबंधित इकाइयों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

इन पांच राज्यों में लग सकती है स्टॉक लिमिट

केंद्र सरकार ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को आवश्यकतानुसार चावल एवं धान पर भंडारण सीमा निर्धारित करने की सहमति दी है।

राज्य सरकारें अपनी जरूरत के अनुसार नियंत्रण आदेश जारी कर सकेंगी। इस व्यवस्था के तहत निर्धारित सीमाएं 31 जनवरी 2027 तक लागू रखी जा सकेंगी।

हालांकि, केंद्र की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि इन पांचों राज्यों में समान मात्रा की भंडारण सीमा तत्काल लागू हो गई है। प्रत्येक राज्य को संबंधित सीमा निर्धारित करने के लिए उचित आदेश जारी करना होगा।

केंद्र और राज्य सरकारें बाजार में उपलब्धता तथा संभावित जमाखोरी की निगरानी करेंगी।

सरकारी चावल की बिक्री का लक्ष्य दोगुना

चावल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने खुला बाजार बिक्री योजना (घरेलू), यानी OMSS(D), के तहत वित्त वर्ष 2026-27 में चावल बेचने का लक्ष्य 25 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन कर दिया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 अक्टूबर 2026 तक ई-नीलामी के माध्यम से निजी खरीदारों को 25 लाख टन चावल बेचा जा चुका था। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह मात्रा 11 लाख टन थी।

इस तरह सरकार खुले बाजार में चावल की अतिरिक्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

'भारत चावल' की आपूर्ति भी बढ़ाएगी सरकार

केंद्र सरकार ने NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार को 'भारत चावल' की अतिरिक्त मात्रा उपलब्ध कराने का फैसला किया है।

इन एजेंसियों को बिक्री के नए माध्यम तलाशने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि विशेष रूप से दक्षिणी राज्यों में उपभोक्ताओं तक अपेक्षाकृत किफायती चावल पहुंचाया जा सके।

सरकार का उद्देश्य बाजार में चावल की आपूर्ति बढ़ाना और खुदरा कीमतों में स्थिरता लाना है। हालांकि, अतिरिक्त चावल बाजार में आने से कीमतों में कितनी कमी होगी, इसका अभी निश्चित अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

चावल की कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई?

बिजनेस स्टैंडर्ड में प्रकाशित पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर 2026 में चावल की खुदरा महंगाई दर सालाना आधार पर 8.25 प्रतिशत पहुंच गई थी, जबकि अगस्त में यह 5.89 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट में औसत खुदरा कीमत लगभग 48.23 रुपये प्रति किलो बताई गई, जो पिछले साल के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत अधिक थी।

विशेष रूप से दक्षिण भारत की कुछ प्रीमियम गैर-बासमती किस्मों में अधिक तेजी देखने को मिली। व्यापारिक सूत्रों के अनुसार, सोना मसूरी चावल के थोक भाव कुछ बाजारों में एक महीने पहले के लगभग 50 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 65 से 70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कमजोर और असमान मानसूनी बारिश के कारण धान की खेती के क्षेत्रफल तथा उत्पादन की संभावनाओं पर असर पड़ा है। हालांकि, मौजूदा स्थिति को देशव्यापी चावल आपूर्ति संकट बताना उचित नहीं होगा।

आम उपभोक्ताओं और किसानों पर क्या असर होगा?

सरकार के इन फैसलों का सीधा उद्देश्य चावल की उपलब्धता बढ़ाना और जमाखोरी के जरिए कीमतें बढ़ाने की आशंकाओं को कम करना है।

कारोबारियों के लिए नियमित स्टॉक घोषणा अनिवार्य होने से प्रशासन को बाजार में उपलब्ध चावल की मात्रा पर बेहतर निगरानी रखने में मदद मिल सकती है।

उपभोक्ताओं को अतिरिक्त सरकारी चावल की बिक्री से राहत मिलने की उम्मीद है। वहीं, धान किसानों के लिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाजार में आपूर्ति बढ़ने और सरकार की बिक्री नीति का थोक कीमतों पर क्या असर पड़ता है।

फिलहाल आम परिवारों के लिए चावल खरीदने या घर में चावल रखने की कोई नई सीमा घोषित नहीं की गई है। नए आदेश मुख्य रूप से व्यापारिक भंडार की निगरानी और बाजार में आपूर्ति सुधारने से संबंधित हैं।

प्रकाशित: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 11:38 PM IST

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