नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026। देश में इलाज के दौरान इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उपकरणों से संबंधित गंभीर प्रतिकूल घटनाओं के आंकड़ों का पहली बार व्यापक खुलासा हुआ है। भारतीय फार्माकोपिया आयोग (IPC) द्वारा सूचना का अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, वर्ष 2020 से 2025 के बीच 9,373 गंभीर प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्ट प्राप्त हुई और उनकी समीक्षा की गई।
इन घटनाओं की सालाना संख्या 2020 में 808 थी, जो 2025 में बढ़कर 2,176 हो गई। यह लगभग 2.7 गुना वृद्धि है।
हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि रिपोर्ट की गई प्रत्येक घटना के लिए संबंधित मेडिकल उपकरण को जिम्मेदार साबित नहीं किया गया है। उपकरण में खराबी, चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़ी समस्या या अन्य कारणों की पहचान के लिए अलग जांच जरूरी होती है।
केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश के बाद सामने आई जानकारी
द इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, ये आंकड़े केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) के 10 सितंबर 2026 के आदेश के बाद उपलब्ध कराए गए।
अखबार ने 27 अक्टूबर को संबंधित जानकारी हासिल की थी। इससे पहले आयोग की वार्षिक रिपोर्टों में मेडिकल उपकरणों से जुड़ी कुल प्रतिकूल घटनाओं की संख्या तो सामने आती थी, लेकिन गंभीर घटनाओं का अलग विस्तृत आंकड़ा सार्वजनिक नहीं किया जाता था।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग देशभर में स्थित लगभग 775 निगरानी केंद्रों से चिकित्सा उपकरणों के संबंध में रिपोर्ट प्राप्त करता है।
किन उपकरणों से जुड़ी शिकायतें आती हैं?
मेडिकल डिवाइस की श्रेणी में इलाज और जांच के दौरान इस्तेमाल होने वाली अनेक वस्तुएं शामिल हैं। इनमें सर्जिकल दस्ताने, सिरिंज, कैथेटर, रक्तचाप मापने वाले उपकरण, वेंटिलेटर और हृदय में लगाए जाने वाले स्टेंट जैसे उपकरण शामिल हो सकते हैं।
एक गंभीर प्रतिकूल घटना ऐसी चिकित्सीय स्थिति हो सकती है जिसमें मरीज की जान को खतरा हो, अस्पताल में लंबे समय तक भर्ती रहना पड़े या स्थायी अक्षमता जैसी स्थिति पैदा हो।
इसका अर्थ यह नहीं है कि संबंधित उपकरण में खराबी होना हर घटना का प्रमाणित कारण है।
2024-25 में कुल 14,584 घटनाएं दर्ज
आयोग की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में चिकित्सा उपकरणों से जुड़ी कुल 14,584 प्रतिकूल घटनाएं दर्ज की गई थीं। इनमें से 22 मामलों को आवश्यक कार्रवाई के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के पास भेजा गया।
वित्त वर्ष 2023-24 में कुल 10,269 घटनाएं दर्ज हुई थीं, जिनमें से 16 मामले CDSCO को भेजे गए थे।
ये आंकड़े सभी प्रकार की मेडिकल डिवाइस प्रतिकूल घटनाओं के हैं, जबकि 9,373 का छह वर्षीय आंकड़ा केवल गंभीर श्रेणी की प्राप्त एवं समीक्षा की गई रिपोर्टों से संबंधित है। दोनों श्रेणियों को एक जैसा नहीं समझना चाहिए।
कंपनियों और उपकरणों के नाम सार्वजनिक क्यों नहीं?
RTI मामले में आयोग ने संबंधित उपकरणों के निर्माताओं और ब्रांड संबंधी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने पर आपत्ति जताई।
आयोग का तर्क था कि कुछ विवरण व्यावसायिक गोपनीयता और तीसरे पक्ष से संबंधित हैं। साथ ही, प्रत्येक मामले में यह निश्चित नहीं है कि समस्या उपकरण की वजह से हुई या चिकित्सा प्रक्रिया से जुड़े अन्य कारणों से।
केंद्रीय सूचना आयोग के आदेश में इस अंतर को स्वीकार किया गया। इसलिए उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर किसी विशेष कंपनी या उत्पाद को इन सभी घटनाओं के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
भारत में कैसे होती है मेडिकल उपकरणों की निगरानी?
केंद्र सरकार ने 2015 में Materiovigilance Programme of India (MvPI) शुरू किया था। इसका उद्देश्य चिकित्सा उपकरणों से संबंधित प्रतिकूल घटनाओं की रिपोर्ट एकत्र करना, उनका वैज्ञानिक विश्लेषण करना और नियामकीय कार्रवाई के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराना है।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग इस कार्यक्रम का राष्ट्रीय समन्वय केंद्र है। चिकित्सकों, स्वास्थ्यकर्मियों, उपकरण कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए शिकायत रिपोर्ट करने के अलग-अलग फॉर्म भी उपलब्ध हैं।
सितंबर 2026 में अस्पतालों के लिए मेडिकल उपकरणों से संबंधित घटनाओं की निगरानी और रिपोर्टिंग पर नया मार्गदर्शन भी जारी किया गया था।
मरीजों के लिए क्या मायने हैं?
नए आंकड़े स्वास्थ्य सेवाओं में उपकरण सुरक्षा, शिकायतों की जांच और जानकारी की पारदर्शिता पर महत्वपूर्ण सवाल उठाते हैं।
हालांकि, रिपोर्टों की संख्या बढ़ने का एक कारण बेहतर निगरानी और शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था का विस्तार भी हो सकता है। बिना कुल उपकरण उपयोग, मरीजों की संख्या और जांच के निष्कर्षों के यह तय नहीं किया जा सकता कि वास्तविक जोखिम कितनी तेजी से बढ़ा है।
मरीज किसी उपकरण से संबंधित समस्या होने पर अपने चिकित्सक या अस्पताल को सूचित कर सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह के बिना किसी आवश्यक उपकरण का उपयोग बंद नहीं करना चाहिए।
प्रकाशित: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 2:34 PM IST

