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दिल्ली-वाराणसी बुलेट ट्रेन को मिली मंजूरी, 3 घंटे 33 मिनट में पूरा होगा सफर

प्रधानमंत्री ने नॉर्दर्न कॉरिडोर को दी हरी झंडी, गुवाहाटी तक जुड़ेगा हाई-स्पीड नेटवर्क।

एक हाई-स्पीड ट्रेन एक ऊंचे पुल पर चल रही है, जिसके नीचे खेत और पेड़ हैं, और दूर एक शहर है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क को मंजूरी दे दी है।
मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली से वाराणसी तक प्रस्तावित बुलेट ट्रेन के नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है, जिससे दिल्ली से वाराणसी का सफर 3 घंटे 33 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। यह नेटवर्क आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक विस्तारित होगा।

  • प्रधानमंत्री ने बुलेट ट्रेन के नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दी है।
  • दिल्ली से वाराणसी का सफर 3 घंटे 33 मिनट में पूरा होने का अनुमान है।
  • यह कॉरिडोर दिल्ली, आगरा, कानपुर, लखनऊ, अयोध्या, वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी को जोड़ेगा।
  • नेटवर्क को गुवाहाटी तक विस्तारित करने की योजना है।
  • बुलेट ट्रेन का किराया हवाई यात्रा से सस्ता रखने की योजना है।
  • वाराणसी से नई दिल्ली के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन भी शुरू की गई है।

वाराणसी, 31 अक्टूबर 2026। उत्तर भारत में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के विस्तार की दिशा में बड़ी घोषणा हुई है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलेट ट्रेन नेटवर्क के प्रस्तावित नॉर्दर्न कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। इस योजना से दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और असम के प्रमुख शहरों को तेज रफ्तार रेल संपर्क से जोड़ने का लक्ष्य है।

रेल मंत्री के मुताबिक, कॉरिडोर तैयार होने के बाद दिल्ली से वाराणसी का सफर महज 3 घंटे 33 मिनट और दिल्ली से आगरा का सफर 59 मिनट में पूरा होने का अनुमान है। हालांकि, ये भविष्य के प्रस्तावित यात्रा समय हैं, मौजूदा ट्रेन सेवाओं की समय-सारणी नहीं।

दिल्ली से गुवाहाटी तक बनेगा हाई-स्पीड रेल नेटवर्क अश्विनी वैष्णव ने वाराणसी में बताया कि नॉर्दर्न कॉरिडोर दिल्ली से शुरू होकर आगरा, कानपुर, लखनऊ और अयोध्या जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा। इसके बाद नेटवर्क वाराणसी, पटना और सिलीगुड़ी होते हुए गुवाहाटी तक विस्तारित करने की योजना है।

इससे उत्तर भारत के प्रमुख औद्योगिक, शैक्षणिक, धार्मिक और पर्यटन केंद्रों के बीच आवागमन तेज होने की उम्मीद है। विशेष रूप से दिल्ली, लखनऊ, अयोध्या और वाराणसी के बीच यात्री संपर्क में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकता है।

किस शहर तक पहुंचने में कितना समय लगेगा? रेल मंत्री की ओर से बताए गए अनुमानित यात्रा समय इस प्रकार हैं:

दिल्ली से वाराणसी सिर्फ 3 घंटे 33 मिनट में! बुलेट ट्रेन के नॉर्दर्न कॉरिडोर को प्रधानमंत्री की मंजूरी, गुवाहाटी तक जुड़ेगा नेटवर्क
केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नॉर्दर्न कॉरिडोर की घोषणा की, जो उत्तर भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ेगा।

ये आंकड़े प्रस्तावित बुलेट ट्रेन नेटवर्क के पूर्ण होने की स्थिति पर आधारित हैं। अंतिम समय-सारणी परियोजना के तकनीकी विवरण और संचालन व्यवस्था तय होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

हवाई टिकट से सस्ता किराया रखने की योजना रेल मंत्री ने कहा कि बुलेट ट्रेन सेवा को केवल अधिक आय वाले यात्रियों तक सीमित नहीं रखा जाएगा। सरकार की मंशा इसका किराया हवाई यात्रा के मुकाबले किफायती रखने की है।

हालांकि, अभी किसी भी मार्ग के लिए टिकट की वास्तविक कीमत की घोषणा नहीं हुई है। परियोजना की लागत, निर्माण शुरू होने की तारीख और परिचालन शुरू होने का समय भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं किया गया है।

वाराणसी से नई दिल्ली के लिए वंदे भारत स्लीपर भी रवाना इसी दिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बनारस रेलवे स्टेशन से नई दिल्ली के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इसके साथ स्थानीय यात्रियों के लिए मेमू रेल सेवाओं की शुरुआत भी की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई रेल सेवाओं से पूर्वांचल और राष्ट्रीय राजधानी के बीच संपर्क बेहतर होगा।

वाराणसी–नई दिल्ली वंदे भारत स्लीपर और प्रस्तावित बुलेट ट्रेन दो अलग परियोजनाएं हैं। वंदे भारत स्लीपर का शुभारंभ हो चुका है, जबकि बुलेट ट्रेन कॉरिडोर अभी भविष्य की योजना है।

पूर्वांचल के विकास को मिल सकती है रफ्तार हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के निर्माण से धार्मिक पर्यटन, व्यवसाय, शिक्षा और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है। वाराणसी, अयोध्या और प्रयागराज जैसे धार्मिक केंद्रों के लिए यात्रा का समय कम होने से पर्यटकों और श्रद्धालुओं को सुविधा मिल सकती है।

रेल मंत्री ने इस अवसर पर काशी रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि स्टेशन को छह प्लेटफॉर्म और बेहतर यात्री सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है।

हालांकि, प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर से होने वाले आर्थिक लाभों का वास्तविक आकलन इसकी अंतिम लागत, किराए, मार्ग और निर्माण अवधि स्पष्ट होने के बाद ही किया जा सकेगा।

प्रकाशित: शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 | 9:29 PM IST

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