सच्ची खबरें • मज़बूत भारत

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और विदेशी बिकवाली से शेयर बाजार में गिरावट के संकेत

अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 115 डॉलर के करीब, निवेशकों की चिंता बढ़ी।

मुंबई में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की इमारत, जिसके सामने एक डिजिटल बोर्ड पर स्टॉक की कीमतें दिख रही हैं।
अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्चतम स्तर के आसपास बनी हुई हैं, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ सकता है।
मुख्य बातें

मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के संकेत हैं क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब हैं, साथ ही विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली कर रहे हैं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर के फैसले का इंतजार है।

  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 114.90 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है।
  • विदेशी संस्थागत निवेशकों ने सोमवार को ₹1,462 करोड़ के शेयर बेचे।
  • अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से 4.75 अरब डॉलर निकाल चुके हैं।
  • अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर निवेशकों की नजर है।
  • भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, जिससे आयात बिल बढ़ सकता है।
  • सोमवार को बीएसई सेंसेक्स 482.92 अंक बढ़कर 73,606.75 अंक पर बंद हुआ था।

मुंबई, 27 अक्टूबर 2026। भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को कारोबार की कमजोर शुरुआत होने के संकेत मिल रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्चतम स्तर के आसपास बनी हुई हैं, जबकि विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आगामी ब्याज दर फैसले ने बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, मंगलवार सुबह 7:53 बजे गिफ्ट निफ्टी 22,669.50 अंक पर कारोबार कर रहा था। यह सोमवार को निफ्टी 50 के 22,753.20 अंक के बंद स्तर से नीचे था। हालांकि, गिफ्ट निफ्टी में गिरावट वास्तविक घरेलू बाजार के गिरकर खुलने की गारंटी नहीं है।

कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब मंगलवार सुबह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 114.90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

पश्चिम एशिया में तनाव और सऊदी अरब पर लगातार हमलों के कारण तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बनी हुई है। इससे कच्चे तेल की कीमतों को समर्थन मिल रहा है।

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ सकता है। लंबे समय तक ऊंची कीमतें बनी रहने पर महंगाई, परिवहन लागत और कंपनियों के मुनाफे पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।

विदेशी निवेशकों ने सोमवार को ₹1,462 करोड़ के शेयर बेचे भारतीय शेयर बाजार से विदेशी निवेशकों की निकासी भी चिंता का कारण बनी हुई है।

उपलब्ध अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, सोमवार 26 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब ₹1,462 करोड़ के शेयर बेचे। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों ने लगभग ₹2,610 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।

रॉयटर्स के मुताबिक, अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगभग 4.75 अरब डॉलर निकाल चुके हैं। वर्ष 2026 में कुल निकासी लगभग 32.56 अरब डॉलर तक पहुंच गई है।

सोमवार को बाजार में आई थी तेजी इससे पहले सोमवार को घरेलू शेयर बाजार ने लगातार चार कारोबारी सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा था।

बीएसई सेंसेक्स 482.92 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 73,606.75 अंक पर बंद हुआ था। वहीं निफ्टी 50 में 153.20 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की तेजी रही और यह 22,753.20 अंक पर बंद हुआ।

हालांकि, मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी लगभग 100 अंक नीचे कारोबार कर रहा था, जिससे पिछले सत्र की तेजी के बाद बाजार पर दोबारा दबाव बनने के संकेत मिले।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर निवेशकों की नजर अब बुधवार, 28 अक्टूबर को अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर है।

रॉयटर्स के अर्थशास्त्रियों के सर्वेक्षण के अनुसार, फेडरल रिजर्व फिलहाल ब्याज दरें स्थिर रख सकता है। हालांकि, भविष्य की मौद्रिक नीति को लेकर उसका रुख वैश्विक बाजारों की दिशा प्रभावित कर सकता है।

यदि अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड में तेजी आती है, तो भारत सहित उभरते बाजारों से विदेशी पूंजी निकासी का जोखिम बढ़ सकता है।

मंगलवार के कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर बाजार की नजर रहेगी।

फिलहाल बाजार में गिरावट की आशंका प्री-मार्केट संकेतों पर आधारित है। वास्तविक स्थिति सुबह 9:15 बजे नियमित कारोबार शुरू होने के बाद स्पष्ट होगी।

प्रकाशित: मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 | 3:15 PM IST

यह खबर शेयर करें

WhatsAppFacebookXTelegram