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कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ की योजना को मंजूरी

मोदी कैबिनेट ने देश में कंटेनर उत्पादन बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण प्रोत्साहन योजना को हरी झंडी दी।

एक बंदरगाह पर वेल्डिंग करने वाले श्रमिक, कंटेनर, क्रेन और एक मालवाहक जहाज।
केंद्र सरकार ने देश में कंटेनर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ की योजना को मंजूरी दी है।
मुख्य बातें

केंद्र सरकार ने देश में शिपिंग कंटेनरों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ₹10,000 करोड़ की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (CMPS) को मंजूरी दी है। इस योजना का लक्ष्य भारत को कंटेनर निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना और समुद्री व्यापार की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना है।

  • केंद्र सरकार ने ₹10,000 करोड़ की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (CMPS) को मंजूरी दी।
  • यह योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक चलेगी, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक कंटेनर निर्माण केंद्र बनाना है।
  • योजना का लक्ष्य भारत की सालाना कंटेनर उत्पादन क्षमता को लगभग दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU करना है।
  • योजना के तहत उत्पादन लागत, पूंजीगत ऋणों पर ब्याज और परीक्षण एवं प्रमाणन सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी।
  • इस योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है।
  • यह योजना केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित की गई थी और अब मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिली है।

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026। केंद्र सरकार ने देश में माल ढुलाई के लिए इस्तेमाल होने वाले शिपिंग कंटेनरों का घरेलू उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ₹10,000 करोड़ की कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना (CMPS) को मंजूरी दे दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई।

योजना वित्त वर्ष 2039-40 तक चलेगी। सरकार का लक्ष्य भारत को कंटेनर निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना, आयात पर निर्भरता कम करना और समुद्री व्यापार की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत करना है।

कंटेनर उत्पादन क्षमता दस गुना बढ़ाने का लक्ष्य सरकार के अनुसार, योजना के जरिए भारत की सालाना कंटेनर उत्पादन क्षमता लगभग दस गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEU करने का लक्ष्य रखा गया है।

TEU कंटेनर क्षमता मापने की अंतरराष्ट्रीय इकाई है, जो 20 फुट लंबे मानक कंटेनर के बराबर होती है।

नई योजना में कंटेनर बनाने वाली फैक्ट्रियों की स्थापना के साथ मौजूदा इकाइयों के विस्तार को भी सहायता दी जाएगी। कंपनियों को ब्याज और उत्पादन लागत में सहायता सरकार ने योजना के अंतर्गत प्रमुख वित्तीय सहायता के लिए तीन प्रावधान घोषित किए हैं। - ₹8,891 करोड़: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार तैयार और बेचे गए कंटेनरों की उत्पादन लागत में सहायता। - ₹859 करोड़: पात्र पूंजीगत ऋणों पर सालाना तीन प्रतिशत ब्याज सहायता। - ₹150 करोड़: परीक्षण एवं प्रमाणन की साझा सुविधाओं का विकास। इन उपायों का उद्देश्य भारतीय निर्माताओं की लागत घटाना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम बनाना है।

53 हजार से अधिक रोजगार सृजन का अनुमान केंद्र सरकार का अनुमान है कि योजना से लगभग 3,000 प्रत्यक्ष और 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

इसके साथ कंटेनर निर्माण में इस्तेमाल होने वाले विशेष स्टील, धातु के पुर्जों, लकड़ी के फ्रेम और पेंट जैसे संबंधित उद्योगों को भी नए व्यावसायिक अवसर मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, ये सरकार के अनुमानित रोजगार आंकड़े हैं। वास्तविक रोजगार सृजन निवेश, उत्पादन और परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका मजबूत करने की तैयारी कंटेनर अंतरराष्ट्रीय व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। सामान को जहाज, रेल और सड़क मार्ग से पहुंचाने के लिए इनका व्यापक इस्तेमाल होता है।

सरकार का मानना है कि देश में कंटेनर उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता कम होगी और भारतीय बंदरगाहों तथा लॉजिस्टिक्स उद्योग के लिए आपूर्ति अधिक विश्वसनीय बन सकेगी।

इस योजना की घोषणा पहले केंद्रीय बजट 2026-27 में की गई थी। अब मंत्रिमंडल की स्वीकृति के बाद इसके क्रियान्वयन का रास्ता साफ हुआ है

प्रकाशित: बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 | 9:19 PM IST

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