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सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी को 'डिजिटल डकैती' कहा, 12 राज्यों के 35 मामलों को एक साथ करने से इनकार

अदालत ने साइबर ठगी के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई, खासकर बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले गिरोहों पर।

एक बूढ़ा व्यक्ति लैपटॉप पर वीडियो कॉल कर रहा है, जिसमें एक वकील और न्याय की देवी दिखाई दे रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी को 'डिजिटल डकैती' करार दिया, जो एक गंभीर साइबर अपराध है।
मुख्य बातें

सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट धोखाधड़ी को 'डिजिटल डकैती' कहा है, यह एक गंभीर अपराध है जिसमें अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और पैसे ऐंठते हैं। अदालत ने 12 राज्यों के 35 आपराधिक मामलों को एक साथ करने से इनकार कर दिया, क्योंकि इससे पीड़ितों और जांच एजेंसियों को असुविधा होती।

  • सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट को 'डिजिटल डकैती' बताया, इसे एक गंभीर साइबर अपराध माना।
  • अदालत ने 12 राज्यों में दर्ज 35 आपराधिक मामलों को एक जगह स्थानांतरित करने की मांग खारिज कर दी।
  • मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने 81 वर्षीय बुजुर्ग से ₹1.90 करोड़ की ठगी के मामले का उल्लेख किया।
  • याचिकाकर्ताओं ने अपनी कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल साइबर अपराधों से प्राप्त धन के लेनदेन के लिए होने दिया।
  • न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने कहा कि केवल आरोपियों की सुविधा के लिए पीड़ितों को परेशान नहीं किया जा सकता।
  • डिजिटल अरेस्ट में अपराधी खुद को सरकारी अधिकारी बताकर वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी की धमकी देते हैं।

नई दिल्ली, 28 अक्टूबर 2026। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर होने वाली साइबर ठगी को गंभीर अपराध बताते हुए इसे 'डिजिटल डकैती' करार दिया। अदालत ने साइबर अपराध से जुड़े 12 राज्यों में लंबित 35 आपराधिक मामलों को एक जगह स्थानांतरित करने की मांग स्वीकार नहीं की।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान विशेष रूप से बुजुर्गों और सेवानिवृत्त व्यक्तियों को निशाना बनाने वाले साइबर अपराध गिरोहों पर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि ऐसे अपराधों से निपटने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई आवश्यक है।

12 राज्यों में 35 मामलों को जोड़ने की थी मांग सुप्रीम कोर्ट में गौरब कुमार साहा और निधि भंडारी की ओर से याचिका दाखिल की गई थी।

दोनों पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल विभिन्न साइबर अपराधों से प्राप्त धन के लेनदेन के लिए होने दिया।

उनके खिलाफ दिल्ली, महाराष्ट्र, केरल, तेलंगाना और गुजरात सहित 12 राज्यों में कुल 35 आपराधिक मामले दर्ज हैं।

याचिकाकर्ताओं ने इन सभी मामलों को एक स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की थी, ताकि संबंधित कानूनी कार्यवाही एक साथ की जा सके।

बुजुर्ग से ₹1.90 करोड़ की ठगी का उदाहरण सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने केरल के एर्नाकुलम निवासी 81 वर्षीय व्यक्ति से कथित रूप से ₹1.90 करोड़ की ठगी के मामले का उल्लेख किया।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत आरोपों के अनुसार, पीड़ित की रकम उस बैंक खाते में जमा हुई थी, जिसका संबंध याचिकाकर्ताओं से बताया गया।

मुख्य न्यायाधीश ने डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से बुजुर्गों को निशाना बनाने वाले संगठित गिरोहों पर कड़ी नाराजगी जताई।

हालांकि, बैंक खाते के कथित इस्तेमाल और संबंधित आरोपियों की आपराधिक जिम्मेदारी पर अंतिम फैसला आना अभी बाकी है।

पीड़ितों को दिल्ली आने के लिए क्यों मजबूर किया जाए? न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची ने सभी मामलों को एक स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग पर सवाल उठाया।

उन्होंने कहा कि केवल आरोपियों की सुविधा के लिए अलग-अलग राज्यों के पीड़ितों और जांच एजेंसियों को परेशानी में नहीं डाला जा सकता।

पीठ ने स्पष्ट किया कि यदि दिल्ली पुलिस जांच की सुविधा के लिए मामलों को स्थानांतरित करने का अनुरोध करती है, तो उस पर विचार किया जा सकता है। लेकिन केवल याचिकाकर्ताओं के अनुरोध पर देशभर में चल रही जांच को प्रभावित नहीं किया जाएगा।

अदालत की टिप्पणियों के बाद दोनों याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका वापस ले ली।

डिजिटल अरेस्ट ठगी क्या होती है? डिजिटल अरेस्ट एक साइबर ठगी का तरीका है, जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, जांच एजेंसी या अन्य सरकारी विभाग का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं।

कई मामलों में ठग वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी, मनी लॉन्ड्रिंग या अन्य आपराधिक कार्रवाई की धमकी देकर पीड़ित से पैसे ट्रांसफर करवा लेते हैं।

कानून में वीडियो कॉल के माध्यम से किसी व्यक्ति को इस तरह 'डिजिटल अरेस्ट' करने की कोई वैध प्रक्रिया नहीं है।

ऐसी कॉल मिलने पर लोगों को पैसे भेजने या अपनी गोपनीय बैंकिंग जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर राष्ट्रीय हेल्पलाइन 1930 या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत की जा सकती है। अदालत की टिप्पणी का क्या महत्व है? सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान डिजिटल अरेस्ट अपराधों की गंभीरता और पीड़ितों के अधिकारों पर जोर दिया है।

हालांकि, बुधवार के घटनाक्रम में अदालत ने याचिकाकर्ताओं को दोषी घोषित नहीं किया और न ही डिजिटल अरेस्ट से जुड़े सभी मामलों में कोई नया सामान्य कानूनी नियम बनाया।

मामलों को एक जगह स्थानांतरित करने की मांग स्वीकार नहीं किए जाने के बाद संबंधित राज्यों में जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी रह सकती है।

प्रकाशित: बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 | 3:59 PM IST

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