प्रयागराज, 29 अक्टूबर 2026। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे, पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम खान को दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। गुरुवार को न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने दोनों की सजा निलंबित करते हुए जमानत मंजूर कर ली।
हालांकि, हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग खारिज कर दी। इसका मतलब है कि दोनों को जेल की सजा के अमल से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन निचली अदालत द्वारा उन्हें दोषी ठहराने का फैसला अभी प्रभावी बना हुआ है।
आजम खान की रिहाई पर अभी संशय हाईकोर्ट के फैसले से अब्दुल्ला आजम के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, उनकी रिहाई आवश्यक कानूनी औपचारिकताओं के पूरा होने पर निर्भर करेगी।
दूसरी ओर, आजम खान की तत्काल रिहाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) और विजिलेंस से जुड़े अन्य मामले भी लंबित हैं। इन मामलों में हिरासत संबंधी कानूनी कार्रवाई होने या न होने के आधार पर उनकी रिहाई तय हो सकती है।
क्या है दो पैन कार्ड का मामला? यह मामला अब्दुल्ला आजम के नाम पर अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो पैन कार्ड बनवाने से जुड़ा है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, एक पैन कार्ड में उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 और दूसरे में 30 सितंबर 1990 दर्ज थी। आरोप था कि वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उम्र संबंधी पात्रता पूरी दिखाने के लिए अलग जन्मतिथि वाले दस्तावेज का इस्तेमाल किया गया।
आजम खान पर अपने बेटे के लिए कथित फर्जी दस्तावेज तैयार कराने की साजिश में शामिल होने का आरोप था। इस संबंध में वर्ष 2019 में रामपुर के सिविल लाइंस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
निचली अदालत ने सुनाई थी सात साल की सजा रामपुर की एमपी-एमएलए अदालत ने नवंबर 2025 में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल के कारावास की सजा सुनाई थी।
इसके बाद मई 2026 में सेशन कोर्ट ने आजम खान की सजा बढ़ाकर 10 वर्ष कर दी थी। अब्दुल्ला आजम की सात वर्ष की सजा बरकरार रखी गई थी, जबकि उन पर लगाए गए जुर्माने में वृद्धि हुई थी।
दोनों ने इन आदेशों को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
क्या चुनाव लड़ने का रास्ता साफ हुआ? हाईकोर्ट ने केवल सजा निलंबित की है, दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगाई है। इसलिए इस फैसले से दोनों नेताओं की चुनावी पात्रता अपने आप बहाल नहीं होती।
किसी भी संभावित चुनावी अयोग्यता का निर्धारण लागू कानून और आगे होने वाली न्यायिक कार्यवाही के आधार पर होगा।
समाजवादी पार्टी के लिए यह महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम है, लेकिन आजम खान और उनके बेटे से जुड़े सभी मुकदमों का अंतिम निपटारा अभी नहीं हुआ है।
प्रकाशित: गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 | 4:28 PM IST

