नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर जारी विवाद के बीच Election Commission of India ने शनिवार शाम कई महत्वपूर्ण फैसलों और प्रक्रियागत बदलावों की घोषणा की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी की बैठक के बाद आयोग ने साफ किया कि जिन मतदाताओं को ‘unmapped’ या अन्य logical discrepancies के कारण नोटिस मिला है, उन्हें सामान्य तौर पर ERO/AERO कार्यालय में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं होना पड़ेगा। NDTV India
नई व्यवस्था में Booth Level Officer (BLO) संबंधित मतदाता के घर जाकर जरूरी दस्तावेज एकत्र करेगा और उन्हें ECINet पर अपलोड करेगा। इसके बाद Electoral Registration Officer उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर फैसला करेगा। केवल विशेष परिस्थितियों में ही व्यक्तिगत सुनवाई की जरूरत होगी।
अगर सुनवाई आवश्यक होती है तो आयोग ने उसे अधिकतर ऑनलाइन माध्यम से करने की व्यवस्था विकसित करने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर मतदाता अपने परिवार के किसी वयस्क सदस्य को भी अपनी ओर से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकेगा। बेघर लोगों, मजदूरों और कमजोर वर्गों के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को पर्याप्त help desks और special camps लगाने को कहा गया है।
दिल्ली के मतदाताओं के लिए भी महत्वपूर्ण राहत दी गई है। SIR के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 30 अक्टूबर तक बढ़ा दी गई है, जबकि इन दावों के निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर तक कर दी गई है। महाराष्ट्र में संबंधित समय-सीमाएं क्रमशः 12 अक्टूबर और 10 नवंबर तक बढ़ाई गई हैं।
गोवा में मतदाता सूची से छूटे 97 लोगों के मामले में आयोग ने बताया कि BLO को उनके घर जाकर आवेदन लेने का निर्देश दिया गया था और इनमें से 81 मतदाता पहले ही Form-6 जमा कर चुके हैं।
बैठक का एक प्रमुख मुद्दा आयोग के भीतर कथित मतभेदों की हालिया खबरें भी रहीं। चुनाव आयोग ने कहा कि SIR शुरू करने का 24 जून 2025 का आदेश और उसके बाद के कार्यक्रम पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से जारी किए गए थे। आयोग के मुताबिक बैठकों के दौरान टिप्पणियां, सुझाव या अलग-अलग राय विचार-विमर्श की सामान्य प्रक्रिया हैं, जबकि अंतिम फैसले सामूहिक रूप से लिए गए।
आयोग ने अपने आंतरिक कामकाज में भी बदलाव की घोषणा की है। भविष्य में बैठकों का agenda पहले उपलब्ध कराया जाएगा और बैठकों की कार्यवाही का रिकॉर्ड यानी minutes तैयार किया जाएगा। इसके अलावा ECINet की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया गया है, जिसमें किसी IIT या IIIT से स्वतंत्र विशेषज्ञ शामिल करने की बात कही गई है।
ये बदलाव उन लाखों मतदाताओं के लिए सीधे महत्वपूर्ण हैं जिन्हें SIR के दौरान दस्तावेज या विवरण में विसंगति के कारण नोटिस मिला है। नई व्यवस्था का व्यावहारिक अर्थ यह है कि ऐसे अधिकांश मतदाताओं को अब दस्तावेज लेकर निर्वाचन कार्यालय के चक्कर लगाने के बजाय BLO के माध्यम से घर पर ही verification प्रक्रिया पूरी करने का विकल्प मिलेगा।

