नई दिल्ली: मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ शुक्रवार को शीर्ष अदालत में एक याचिका दाखिल की गई है, जिसमें SIR से जुड़े कुछ फैसलों की वैधता की जांच और कथित अनियमितताओं की पड़ताल के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने समेत कई मांगें की गई हैं।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि SIR से संबंधित कई महत्वपूर्ण निर्णय निर्वाचन आयोग के अन्य दो सदस्यों की सहमति के बिना लिए गए। इसी आधार पर याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की है। हालांकि ये याचिकाकर्ता के आरोप हैं और सुप्रीम कोर्ट ने अभी इन आरोपों को सही नहीं ठहराया है।
याचिका में SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में हुए बदलावों की व्यापक जांच की मांग भी की गई है। रिपोर्टों के अनुसार करीब 13 करोड़ मतदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कराने का अनुरोध किया गया है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया कानून और निर्धारित नियमों के अनुरूप हुई या नहीं।
मामले की पृष्ठभूमि में निर्वाचन आयोग के भीतर कथित मतभेद से जुड़ी हालिया रिपोर्ट भी है। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े कुछ मुद्दों और निर्णय प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज की थीं। निर्वाचन आयोग ने इस विवाद पर कहा है कि किसी संस्था के भीतर अलग-अलग विचार और टिप्पणियां सामान्य deliberative process का हिस्सा हैं तथा पिछले एक वर्ष में आयोग के सभी आदेश पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम रहे हैं।
इस विवाद के बीच शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC को हटाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किए। गुवाहाटी में असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया, जबकि पटना और चंडीगढ़ में प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने water cannons का इस्तेमाल किया। नई दिल्ली में निर्वाचन आयोग कार्यालय के बाहर भी सुरक्षा बढ़ाई गई। The Times of India
विपक्ष के कई दल पहले से ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और SIR प्रक्रिया की जांच की मांग कर रहे हैं। दूसरी ओर BJP ने निर्वाचन आयोग के भीतर अलग-अलग विचार सामने आने को संस्थागत चर्चा का सामान्य हिस्सा बताते हुए विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है।
अब निगाह सुप्रीम कोर्ट पर है कि वह याचिका को सुनवाई के लिए कब सूचीबद्ध करता है और इसमें की गई मांगों पर क्या रुख अपनाता है। फिलहाल याचिका दाखिल हुई है; न तो SIT गठित हुई है और न ही CEC के खिलाफ किसी आरोप पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष आया है।

