नई दिल्ली: देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और उत्पादन में संभावित कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने इथेनॉल खरीद नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकारी तेल कंपनियां 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष में गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी।
सरकारी निर्देश के आधार पर 16 अक्टूबर को जारी संयुक्त निविदा में इन कच्चे माल से तैयार इथेनॉल के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाना और कीमतों पर दबाव कम करना है।
चीनी उत्पादन को प्राथमिकता महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में कमजोर बारिश के कारण फसल प्रभावित होने की आशंका है। इससे नए उत्पादन सत्र में चीनी की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
सरकार चाहती है कि गन्ने का अधिक इस्तेमाल चीनी उत्पादन में हो, ताकि घरेलू मांग पूरी की जा सके।
हालांकि, इस फैसले का मतलब सभी प्रकार के इथेनॉल उत्पादन पर प्रतिबंध नहीं है। मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम के अतिरिक्त चावल और सी-हैवी शीरे से बने इथेनॉल की खरीद जारी रह सकेगी।
1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने की तैयारी सरकारी तेल कंपनियों ने नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर इथेनॉल खरीदने की निविदा जारी की है।
इस दौरान पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम जारी रहेगा। हालांकि, चीनी आधारित कच्चे माल की खरीद सीमित होने से वैकल्पिक स्रोतों पर निर्भरता बढ़ेगी।
नई निविदा में मक्का आधारित इथेनॉल का खरीद मूल्य भी ₹71.86 से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर किया गया है।
शेयर बाजार में दिखा फैसले का असर सरकार की नई नीति का असर सोमवार को शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। चीनी उत्पादन से जुड़ी कई कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई।
बलरामपुर चीनी मिल्स, बजाज हिंदुस्तान शुगर, श्री रेणुका शुगर्स और अन्य प्रमुख कंपनियों के शेयर कारोबार के दौरान लगभग 2 से 7 प्रतिशत तक गिरे।
निवेशकों को आशंका है कि इथेनॉल की खरीद सीमित होने से चीनी मिलों की आय और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है।
क्या आम लोगों को मिलेगी सस्ती चीनी? सरकार के फैसले से घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। लेकिन खुदरा कीमतों में कितनी कमी आएगी, यह उत्पादन, बाजार की मांग और वितरण व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
नई नीति का असर आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। वहीं, चीनी मिलों और गन्ना किसानों की आय पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी उद्योग जगत की नजर बनी हुई है।
प्रकाशित: सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 | 10:04 PM IST

