न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif के भाषण के बाद भारत ने Right of Reply का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के कश्मीर और आतंकवाद संबंधी बयानों को खारिज किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की फर्स्ट सेक्रेटरी पेटल गहलोत ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद जारी रहने पर उसके परिणाम होंगे और भारत अपनी सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने का अधिकार रखता है।
शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को UNGA के मंच से जम्मू-कश्मीर, सिंधु जल और 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव का जिक्र किया था। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उस संघर्ष को रोकने में भूमिका निभाने का श्रेय भी दिया। भारत पहले से किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता के दावे को खारिज करता रहा है।
भारत की ओर से जवाब देते हुए गहलोत ने पाकिस्तान के दावों को अस्वीकार किया और कहा कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है और रहेगा। उन्होंने इसके बजाय पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया। Hindustan Live
भारतीय प्रतिनिधि ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए अल-कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन के पाकिस्तान के एबटाबाद में पाए जाने का भी जिक्र किया। भारत ने आरोप लगाया कि सुरक्षा और शांति की बात करने के साथ सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने की नीति स्वीकार्य नहीं हो सकती।
गहलोत ने पाकिस्तान में लोकतंत्र और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पाकिस्तान की राजनीति में सेना के प्रभाव तथा ईशनिंदा कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि धार्मिक सहिष्णुता और लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाकिस्तान की आलोचना विरोधाभासी है।
भारत ने 2025 के सैन्य टकराव पर शहबाज शरीफ के दावों को भी चुनौती दी। भारतीय पक्ष ने पाकिस्तान के सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान का उल्लेख करते हुए उसके “जीत” के दावे को खारिज किया। दोनों देशों के सैन्य घटनाक्रम को लेकर पाकिस्तान और भारत के सार्वजनिक दावे अलग-अलग रहे हैं।
यह प्रतिक्रिया शुक्रवार रात न्यूयॉर्क में शहबाज शरीफ के संबोधन के कुछ समय बाद आई और शनिवार सुबह भारतीय समाचार चक्र की प्रमुख कूटनीतिक खबर बन गई।

