रियाद/यानबू: वैश्विक तेल बाजार के लिए मंगलवार शाम महत्वपूर्ण राहत की खबर आई है। सऊदी अरब ने हमले के बाद बंद हुई अपनी रणनीतिक East-West crude oil pipeline का संचालन फिर शुरू कर दिया है। यह पाइपलाइन पूर्वी सऊदी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के यानबू बंदरगाह से जोड़ती है और Hormuz Strait पर निर्भरता कम करने का महत्वपूर्ण वैकल्पिक रास्ता है।
Reuters के मुताबिक पाइपलाइन फिलहाल कम दर पर तेल पंप कर रही है और इसे धीरे-धीरे पूरी क्षमता तक पहुंचाने का काम चल रहा है। यह मार्ग लगभग 40 लाख बैरल प्रतिदिन तक तेल ले जाने में इस्तेमाल होता रहा है—जो वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 4% के बराबर है।
13 सितंबर को ड्रोन हमलों के बाद पाइपलाइन बंद करनी पड़ी थी। इससे यानबू से crude loading रुक गई थी और सऊदी अरब को कुछ यूरोपीय ग्राहकों के कार्गो रद्द करने तथा पूर्वी बंदरगाहों के जरिए अतिरिक्त तेल भेजने जैसे वैकल्पिक कदम उठाने पड़े थे।
पाइपलाइन दोबारा शुरू होने का असर तुरंत अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिखाई दिया। मंगलवार को Brent crude करीब 2% गिरकर लगभग $98 प्रति बैरल के स्तर तक आ गया और दो सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंचा। कीमतों में गिरावट के पीछे सऊदी सप्लाई बहाल होने के साथ ईरान की ओर से Strait of Hormuz दोबारा खोलने की संभावनाओं से जुड़ी कूटनीतिक गतिविधियां भी एक कारण रहीं।
सऊदी अरब यानबू से तेल निर्यात फिर शुरू करने की तैयारी भी कर रहा है। Reuters के अनुसार एक crude cargo यानबू से चीन भेजे जाने की योजना है, जबकि ट्रेडर आगे की खेपों को संभालने के लिए मिस्र के Port Said और Sidi Kerir जैसे स्थानों पर टैंकरों की व्यवस्था कर रहे हैं। Saudi Aramco ने हालांकि Reuters की इस रिपोर्ट पर सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की है।
भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए अंतरराष्ट्रीय crude कीमतों में गिरावट सकारात्मक है, क्योंकि इससे आयात लागत पर दबाव कम हो सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम तुरंत घट जाएंगे; घरेलू कीमतें कर, रिफाइनिंग लागत, विनिमय दर और तेल कंपनियों के मूल्य निर्धारण जैसे कई कारकों पर निर्भर करती हैं। 22 सितंबर को भारत के प्रमुख शहरों में खुदरा ईंधन कीमतें व्यापक रूप से स्थिर थीं।

