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ओडिशा तट पर ONGC को मिली प्राकृतिक गैस, महानदी बेसिन में बड़ी खोज

ONGC के पहले डीपवॉटर कुएं में गैस का प्रवाह, ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती।

झटपट समझें

सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ONGC को ओडिशा तट के पास महानदी बेसिन के गहरे समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक गैस मिली है। यह खोज कंपनी के मौजूदा डीपवॉटर अभियान के पहले कुएं MDW-28 (MN-DW18-1-H-D) में हुई है, जिससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा मिल सकता है। यह कुआं कोणार्क तट से करीब 43 किलोमीटर दूर और लगभग 770 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में स्थित है।

मुख्य बातें

  • ONGC को ओडिशा तट के पास महानदी बेसिन में प्राकृतिक गैस मिली है।
  • यह खोज कंपनी के पहले डीपवॉटर कुएं MDW-28 (MN-DW18-1-H-D) में हुई है।
  • कुआं कोणार्क तट से लगभग 43 किलोमीटर दूर और 770 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में स्थित है।
  • गैस मिलने वाला क्षेत्र लगभग 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई पर है।
  • यह खोज केंद्र सरकार की ‘समुद्र मंथन’ पहल का हिस्सा है।
  • यह खोज भारत के घरेलू गैस उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ा सकती है।
ओडिशा तट पर ONGC को मिली प्राकृतिक गैस
ओडिशा तट के पास महानदी बेसिन में ONGC को प्राकृतिक गैस मिली है।

भुवनेश्वर/कोणार्क: सरकारी तेल एवं गैस कंपनी ONGC को ओडिशा तट के पास महानदी बेसिन के गहरे समुद्री क्षेत्र में प्राकृतिक गैस मिली है। कंपनी के मौजूदा डीपवॉटर अभियान के पहले कुएं MDW-28 (MN-DW18-1-H-D) से गैस का प्रवाह दर्ज हुआ है और शुरुआती परीक्षण में रिजर्वायर का दबाव भी स्थिर बना हुआ है।

यह कुआं कोणार्क तट से करीब 43 किलोमीटर दूर और लगभग 770 मीटर गहरे समुद्री क्षेत्र में स्थित है। ONGC के अनुसार भूगर्भीय और उप-सतही आंकड़ों के मूल्यांकन के बाद 18 सितंबर को कुएं में परीक्षण किया गया, जिसके बाद लगातार गैस का प्रवाह सामने आया।

MDW-28 को करीब 1,623 मीटर की कुल गहराई तक ड्रिल किया गया है, जबकि गैस मिलने वाला क्षेत्र लगभग 1,441 से 1,452 मीटर की गहराई पर बताया गया है। यह ONGC के वर्तमान महानदी डीपवॉटर अभियान के तहत प्रस्तावित चार कुओं में पहला है।

यह अभियान 25 जुलाई 2026 को शुरू हुआ था और केंद्र सरकार की ‘समुद्र मंथन’ पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत के गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में घरेलू तेल एवं गैस संसाधनों की खोज बढ़ाना है।

हालांकि इस खोज को अभी किसी विशाल व्यावसायिक गैस भंडार के रूप में घोषित करना जल्दबाजी होगी। ONGC ने अभी गैस भंडार के अनुमानित आकार या व्यावसायिक उत्पादन की व्यवहार्यता का आंकड़ा जारी नहीं किया है।

आगे के परीक्षण और appraisal से ही यह तय होगा कि यहां कितनी गैस निकाली जा सकती है और इसका व्यावसायिक उत्पादन आर्थिक रूप से संभव होगा या नहीं। कंपनी के मुताबिक यह खोज आसपास पहले मिली गैस खोजों के साथ साझा बुनियादी ढांचे के जरिए विकसित की जा सकती है।

तट से अपेक्षाकृत कम दूरी भी भविष्य में परियोजना को उत्पादन तक पहुंचाने में मदद कर सकती है, लेकिन यह आगे के मूल्यांकन पर निर्भर करेगा। भारत अपनी तेल और गैस जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है।

ऐसे में यदि महानदी बेसिन की यह खोज व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य साबित होती है, तो यह घरेलू गैस उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है।

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