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जंतर-मंतर से प्रदर्शन स्थल का दर्जा हटाने पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दिया जवाब

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के अपने फैसले का सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया है, जिसमें सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को प्रमुख आधार बताया गया है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करते लोग और दिल्ली पुलिस के अधिकारी
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के अपने फैसले का बचाव किया है।
मुख्य बातें

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के अपने फैसले का बचाव किया है। पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की सुरक्षा को इस फैसले का प्रमुख आधार बताया है। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को चिह्नित किया गया है।

  • दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने के अपने फैसले का सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया।
  • पुलिस ने सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को फैसले का प्रमुख आधार बताया।
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया।
  • जंतर-मंतर की अनुमानित क्षमता 1,500 लोगों की है, जबकि यहां सालाना औसतन 1,300 से अधिक प्रदर्शन होते थे।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी को निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं है।
  • अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन और नागरिकों के आजीविका तथा आवागमन के अधिकारों के बीच संतुलन की आवश्यकता बताई।

नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। राजधानी के ऐतिहासिक जंतर-मंतर को निर्धारित धरना-प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले का दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में बचाव किया है। पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार की ओर से दाखिल जवाबी हलफनामे में सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात व्यवस्था, आपातकालीन सेवाओं और महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों की सुरक्षा को इस फैसले का प्रमुख आधार बताया गया है।

गृह मंत्रालय की समिति की सिफारिश पर लिया फैसला

दिल्ली पुलिस के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 28 अगस्त 2026 को जंतर-मंतर की उपयुक्तता का आकलन करने के लिए एक समिति गठित की थी। समिति ने सितंबर में अपनी रिपोर्ट सौंपकर इस स्थान को बड़े धरना-प्रदर्शनों के लिए अनुपयुक्त बताया।

इसके बाद 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने आदेश जारी कर जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी ग्राउंड को चिह्नित किया गया।

इस आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर को केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा था।

अस्पतालों और एंबुलेंस की आवाजाही पर असर का दावा

पुलिस ने हलफनामे में कहा है कि जंतर-मंतर के आसपास प्रदर्शनों के दौरान भीड़ और सड़क जाम के कारण एंबुलेंस तथा मरीजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर की अनुमानित क्षमता करीब 1,500 लोगों की है, जबकि यहां सालाना औसतन 1,300 से अधिक धरने-प्रदर्शन आयोजित होते रहे हैं।

हलफनामे में यह भी बताया गया कि आसपास के क्षेत्र में विदेशी दूतावास, सरकारी कार्यालय, आवासीय परिसर और व्यस्त कारोबारी इलाके स्थित हैं। पुलिस ने इन्हें सुरक्षा तथा भीड़ प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां बताया है।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शन के अधिकार पर क्या कहा?

मंगलवार की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति या संगठन को निर्धारित प्रदर्शन स्थल पर अनिश्चितकाल तक कब्जा बनाए रखने का अधिकार नहीं है। अदालत के अनुसार, सार्वजनिक स्थानों का इस्तेमाल दूसरे नागरिकों और संगठनों को भी अपनी मांगें उठाने के लिए मिलना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार के साथ व्यापारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की आजीविका तथा आवागमन के अधिकारों के बीच संतुलन की आवश्यकता बताई।

प्रकाशित: मंगलवार, 3 नवंबर 2026 | 8:34 PM IST

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