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दिल्ली में वायु प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित, AQI 389 पर पहुंचा

सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों के धुएं और पराली जलाने पर जताई चिंता, व्यावहारिक समाधानों पर जोर दिया।

धुंध भरे दिन में मास्क पहने लोग और वाहन सड़क पर चल रहे हैं।
दिल्ली-एनसीआर में बिगड़ती वायु गुणवत्ता पर सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई।
मुख्य बातें

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है, जहां 6 नवंबर 2026 को सुबह 8 बजे AQI 389 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। अदालत ने वाहनों के प्रदूषण, पराली जलाने और यातायात जाम जैसी समस्याओं पर चर्चा की, और दीर्घकालिक समाधानों की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • 6 नवंबर 2026 को दिल्ली का AQI 389 दर्ज किया गया, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने वाहनों के प्रदूषण और पराली जलाने को दिल्ली के वायु प्रदूषण का मुख्य कारण बताया।
  • अदालत ने पराली प्रबंधन के लिए ग्राम पंचायतों को मशीनें उपलब्ध कराने का सुझाव दिया।
  • न्यायमित्र ने दिल्ली की हवा की तुलना प्रतिदिन 30 सिगरेट पीने जैसी स्थिति से की।
  • दीपावली से पहले प्रदूषण नियंत्रण एक बड़ी चुनौती है, 8 नवंबर को दीपावली है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 7 और 8 नवंबर को केवल ग्रीन पटाखे सीमित समय के लिए चलाने की अनुमति दी है।

नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजधानी में वाहनों से होने वाले प्रदूषण, पराली जलाने और यातायात जाम जैसी समस्याओं पर चिंता जताई। अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए मौजूदा उपायों के साथ व्यावहारिक और दीर्घकालिक समाधान तलाशने की जरूरत पर चर्चा की।

इस बीच शुक्रवार सुबह आठ बजे दिल्ली का समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 389 दर्ज किया गया, जो भारतीय मानकों के अनुसार 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। राजधानी के कई निगरानी केंद्रों पर प्रदूषण का स्तर 400 से ऊपर पहुंच गया।

वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का जोर

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने अदालत को बताया कि दिल्ली में प्रदूषण की समस्या केवल पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से नहीं जुड़ी है। स्थानीय स्तर पर वाहनों का धुआं, ऊर्जा उत्पादन और कचरा जलाना भी महत्वपूर्ण कारण हैं।

मुख्य न्यायाधीश ने दिल्ली को एनसीआर के अन्य शहरों से जोड़ने वाली सड़कों पर वाहनों की लंबी कतारों का मुद्दा उठाया। उन्होंने सार्वजनिक परिवहन की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होने पर भी चिंता जताई।

केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि प्रदूषण कम करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि, सुनवाई में यह बात भी सामने आई कि सीमा क्षेत्रों और टोल प्लाजा से जुड़े पहले के कुछ निर्देशों का पालन पूरी तरह नहीं हुआ है।

पराली प्रबंधन के लिए ग्राम पंचायतों को मशीन देने का सुझाव

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब और हरियाणा के खेतों में पराली जलाने की समस्या पर भी चर्चा हुई।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि पराली प्रबंधन के लिए इस्तेमाल होने वाली महंगी मशीनों को व्यक्तिगत किसानों के बजाय ग्राम पंचायतों को उपलब्ध कराना अधिक उपयोगी हो सकता है। इससे छोटे किसानों को भी मशीनों का इस्तेमाल करने में सुविधा मिलेगी।

उन्होंने पराली की खरीद के लिए पहले से मूल्य निर्धारित करने और एकत्रित पराली के भंडारण की व्यवस्था बनाने जैसे उपायों पर भी विचार करने को कहा।

सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठा कि मशीन मिलने के बावजूद ईंधन का खर्च और छोटे खेतों में उसका इस्तेमाल किसानों के लिए कठिन हो सकता है।

केंद्र सरकार के वकील ने इन सुझावों को कृषि मंत्रालय के सामने रखने की बात कही। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में इन्हें अदालत के अंतिम बाध्यकारी आदेश के रूप में दर्ज नहीं किया गया है।

अदालत में '30 सिगरेट' वाली तुलना पर भी चर्चा

सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अपराजिता सिंह ने दिल्ली की खराब हवा की गंभीरता समझाने के लिए प्रतिदिन लगभग 30 सिगरेट पीने जैसी स्थिति से तुलना की।

यह टिप्पणी वायु प्रदूषण के स्वास्थ्य संबंधी खतरे पर जोर देने के लिए की गई थी। इसे किसी व्यक्ति के वास्तविक सिगरेट सेवन या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित व्यक्तिगत जोखिम के बराबर नहीं समझना चाहिए।

अदालत में इस बात पर भी चर्चा हुई कि सर्दियों के दौरान मौसम की परिस्थितियां प्रदूषक कणों को वातावरण की निचली परतों में रोके रख सकती हैं, जिससे प्रदूषण बढ़ने की समस्या और गंभीर हो जाती है।

दीपावली से पहले प्रदूषण नियंत्रण की चुनौती

दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण की यह स्थिति दीपावली से ठीक पहले सामने आई है। इस वर्ष दीपावली 8 नवंबर को है।

सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर के अपने आदेश में 7 और 8 नवंबर को केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखे सीमित समय के लिए चलाने की अनुमति दी थी। इन दोनों दिनों में सुबह छह से सात बजे और रात आठ से दस बजे तक ही इनका इस्तेमाल किया जा सकेगा।

अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों और अधिसूचित शांत क्षेत्रों के आसपास 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने पर प्रतिबंध रहेगा। शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी प्रतिबंध लागू हैं। 9 नवंबर से पूर्ण प्रतिबंध फिर प्रभावी हो जाएगा।

ये नियम पहले दिए गए आदेश का हिस्सा हैं, शुक्रवार की सुनवाई में जारी कोई नया निर्देश नहीं।

दिल्लीवासियों के स्वास्थ्य पर चिंता

वायु गुणवत्ता सूचकांक 301 से 400 के बीच होने पर हवा 'बहुत खराब' मानी जाती है, जबकि 401 से 500 के बीच 'गंभीर' श्रेणी होती है।

ऐसी स्थिति में लंबे समय तक बाहर रहने से विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों और सांस या हृदय संबंधी बीमारी वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।

नागरिकों को वायु गुणवत्ता की नियमित जानकारी देखने, अधिक प्रदूषण के समय अनावश्यक बाहरी शारीरिक गतिविधियों को सीमित करने और सांस लेने में तकलीफ होने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत है।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि शुक्रवार की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कोई नया लिखित आदेश जारी किया है या नहीं।

प्रकाशित: शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 | 2:32 PM IST

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