नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट की नकल कर लोगों की निजी और वित्तीय जानकारी चुराने की कोशिशों को लेकर नई चेतावनी जारी की है। मंगलवार को जारी सार्वजनिक सूचना में अदालत की रजिस्ट्री ने एक नए फर्जी डोमेन की पहचान की है, जिसके जरिए साइबर अपराधी लोगों को धोखा देकर उनकी संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास कर सकते हैं।
किस फर्जी वेबसाइट को लेकर जारी हुई चेतावनी?
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने scigovinjudicial.com नामक वेबसाइट को फर्जी बताया है। यह डोमेन सर्वोच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट जैसा दिखाई देने के उद्देश्य से बनाया गया है।
अदालत के अनुसार, इस तरह की फर्जी वेबसाइटों का इस्तेमाल फिशिंग हमलों के लिए किया जा सकता है। इसमें अपराधी किसी भरोसेमंद संस्था की पहचान का इस्तेमाल कर लोगों से पासवर्ड, लॉगिन जानकारी, व्यक्तिगत दस्तावेज या बैंकिंग विवरण प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
रजिस्ट्री ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट का डोमेन sci.gov.in है। उपयोगकर्ताओं को किसी भी संदिग्ध वेबसाइट पर जानकारी दर्ज करने से पहले उसका सही पता जांचना चाहिए।
पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी फर्जी वेबसाइटें
यह पहली बार नहीं है जब सुप्रीम कोर्ट ने वेबसाइट की नकल करने वाले साइबर अपराधियों के खिलाफ चेतावनी जारी की है।
नई सार्वजनिक सूचना में अदालत ने बताया है कि 16 जुलाई 2025, 28 अप्रैल 2026 और 13 अगस्त 2026 को भी इसी तरह की फर्जी वेबसाइटों के संबंध में चेतावनी जारी की गई थी।
इससे स्पष्ट होता है कि न्यायिक संस्थाओं के नाम का दुरुपयोग कर लोगों को ठगने की कोशिशें पहले भी सामने आ चुकी हैं। हालांकि, नई वेबसाइट से कितने लोग प्रभावित हुए हैं या कितनी वित्तीय हानि हुई है, इसकी कोई संख्या अदालत की ताजा सूचना में नहीं दी गई है।
अगर फर्जी वेबसाइट पर जानकारी दर्ज कर दी है तो क्या करें?
सुप्रीम कोर्ट ने लोगों को संदिग्ध लिंक खोलने और उन पर व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा करने से बचने की सलाह दी है।
जिन लोगों को आशंका है कि उनकी जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच गई है, उन्हें तत्काल अपने ऑनलाइन खातों के पासवर्ड बदलने चाहिए। बैंकिंग जानकारी के दुरुपयोग का संदेह होने पर संबंधित बैंक से संपर्क कर अनधिकृत गतिविधियों की सूचना देनी चाहिए।
वित्तीय साइबर धोखाधड़ी होने पर भारत सरकार की हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की जा सकती है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर भी शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध है।
आधिकारिक वेबसाइट की पहचान क्यों जरूरी है?
साइबर अपराधी ऐसी वेबसाइट तैयार कर सकते हैं जिनका डिजाइन, रंग और भाषा किसी सरकारी या न्यायिक पोर्टल से मिलती-जुलती हो। ऐसे में केवल वेबसाइट का दिखना उसकी विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है।
उपयोगकर्ताओं को वेबसाइट के वास्तविक डोमेन की जांच करनी चाहिए। मोबाइल पर संदिग्ध लिंक को खोलने के बजाय आधिकारिक वेबसाइट का पता सीधे ब्राउजर में लिखना अधिक सुरक्षित विकल्प है।
प्रकाशित: मंगलवार, 3 नवंबर 2026 | 8:39 PM IST

